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जन्माष्टमी आज : रात 11:57 से 12:42 बजे तक रहेगा पूजा का मुहूर्त, ऐसे करें मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा

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Sep 04, 2026
02:02 AM
रात 11:57 से 12:42 बजे तक रहेगा पूजा का मुहूर्त, ऐसे करें मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा

नई दिल्ली। देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंदिरों से लेकर घरों तक भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। भक्त दिनभर व्रत रखकर रात में भगवान कृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इस पर्व को कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती और श्रीकृष्ण जयंती समेत कई नामों से जाना जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव मनाया जा रहा है।

रात 11:57 से 12:42 बजे तक रहेगा पूजा का मुहूर्त

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर को रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू हो चुकी है और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। वहीं, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की मुख्य पूजा के लिए रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। यानी भक्तों को मध्यरात्रि में भगवान के जन्मोत्सव और पूजा के लिए कुल 45 मिनट का समय मिलेगा।

भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र रात 12 बजकर 29 मिनट से पहले ही शुरू हो चुका है और आज रात 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।

पंचामृत से होगा लड्डू गोपाल का अभिषेक

जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की पूजा के लिए उनकी मूर्ति, झूला, नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और फूलों की आवश्यकता होती है। भगवान के अभिषेक के लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत तैयार किया जाता है। भोग में माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाइयां अर्पित की जाती हैं। भोग में तुलसी दल शामिल करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

ऐसे करें मध्यरात्रि में श्रीकृष्ण की पूजा

भक्त सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ कर सजाएं और बाल गोपाल को सुंदर झूले में विराजमान करें। मध्यरात्रि में भगवान को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं। इसके बाद मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से उनका श्रृंगार करें। माखन-मिश्री, पंचामृत और फलों का भोग लगाकर आरती करें और भगवान को झूला झुलाएं। इसके बाद प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।

इन मंत्रों का करें जाप

पूजन के दौरान ‘कृं कृष्णाय नमः’, ‘ॐ क्लीं कृष्णाय नमः’, ‘गोकुल नाथाय नमः’ और ‘ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नमः’ जैसे मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

जन्माष्टमी पर करें ये उपाय

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जन्मोत्सव के बाद लड्डू गोपाल का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। वहीं, रात में भगवान को पान का पत्ता अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। अगले दिन उस पत्ते पर रोली से श्री यंत्र बनाकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां दूर होने में सहायता मिलती है।

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