जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर थे बच्चे : पखांजूर में सरकार का इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने खुद बनाया बांस-बल्ली का स्कूल, पूरे गांव ने किया उद्घाटन

पखांजूर से TV27NEWS के संवाददाता देवजीत देवनाथ की रिपोर्ट
पखांजूर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र के खैरकट्टा गांव से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो एक ओर ग्रामीणों के जज़्बे को सलाम करने पर मजबूर करती है, तो दूसरी ओर सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। वर्षों तक जर्जर स्कूल भवन में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चों के लिए ग्रामीणों ने सरकार का इंतजार छोड़ खुद ही बांस-बल्ली का अस्थायी स्कूल तैयार कर दिया। स्कूल बनकर तैयार होने के बाद पूरे गांव ने उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उसका विधिवत उद्घाटन किया।
जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर थे बच्चे
खैरकट्टा प्राथमिक स्कूल का भवन लंबे समय से जर्जर हालत में है। बारिश के मौसम में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई थी। ग्रामीणों ने कई बार शिक्षा विभाग और प्रशासन से नए स्कूल भवन की मांग की, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हुई।

ग्रामीणों ने किया श्रमदान, जंगल से लाए बांस-बल्ली
जब लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकला तो गांव के लोगों ने सामूहिक पहल करने का फैसला किया। ग्रामीण कई दिनों तक जंगल से बांस और बल्लियां लाते रहे और श्रमदान कर बच्चों के लिए एक अस्थायी स्कूल का निर्माण कर दिया। इस पहल में गांव के कई लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

उद्घाटन में उमड़ा पूरा गांव
स्कूल तैयार होने के बाद गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। उद्घाटन समारोह में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने नए स्कूल का विधिवत उद्घाटन किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल स्कूल का उद्घाटन नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा बचाने की सामूहिक कोशिश और व्यवस्था को आईना दिखाने वाली पहल है।

पूर्व विधायक ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं
कार्यक्रम में पहुंचे पूर्व विधायक ने ग्रामीणों और स्कूली बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों तक ग्रामीणों की मांग पहुंचाने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय पर नया स्कूल भवन बन जाता, तो उन्हें खुद स्कूल बनाने की जरूरत नहीं पड़ती।
अब स्थायी स्कूल भवन की मांग
फिलहाल बांस-बल्ली से बना यह अस्थायी स्कूल बच्चों की पढ़ाई का सहारा बना हुआ है। हालांकि ग्रामीणों की मांग है कि शासन और प्रशासन जल्द से जल्द गांव में स्थायी और सुरक्षित स्कूल भवन का निर्माण कराए, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
ग्रामीणों की यह पहल बताती है कि जब व्यवस्था अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे रह जाती है, तब समाज खुद आगे बढ़कर समाधान तलाशता है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस अनोखी पहल के बाद कितनी जल्दी स्थायी स्कूल भवन के निर्माण की दिशा में कदम उठाता है।

नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
