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55 के हुए ड्वेन लेवरॉक: : 127 किलो के वजनी खिलाड़ी की बिजली सी फुर्ती, हैरतअंगेज कैच लपककर बना था क्रिकेट का अमर हीरो

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jul 14, 2026
08:23 AM
127 किलो के वजनी खिलाड़ी की बिजली सी फुर्ती, हैरतअंगेज कैच लपककर बना था क्रिकेट का अमर हीरो

नई दिल्ली। क्रिकेट के इतिहास में कुछ पल ऐसे होते हैं, जो मैच के नतीजे से कहीं ज्यादा लंबे समय तक याद रखे जाते हैं। ऐसा ही एक लम्हा 2007 वनडे विश्व कप में देखने को मिला था, जब बरमूडा के खिलाड़ी ड्वेन लेवरॉक ने भारत के खिलाफ ऐसा कैच लपका कि पूरी दुनिया उनकी मुरीद हो गई। भारी-भरकम शरीर के बावजूद उनकी फुर्ती ने हर किसी को हैरान कर दिया और वह रातों-रात अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हो गए। 14 जुलाई 1971 को बरमूडा में जन्मे ड्वेन लेवरॉक आज 55 वर्ष के हो गए हैं। उनके जन्मदिन पर एक बार फिर वह ऐतिहासिक कैच क्रिकेट प्रेमियों की यादों में ताजा हो गया है।

जब फ्रिज ने हवा में उड़कर लपका कैच

19 मार्च 2007 को भारत और बरमूडा के बीच खेले गए विश्व कप मुकाबले में रॉबिन उथप्पा के बल्ले से निकला तेज किनारा स्लिप की दिशा में गया। करीब 127 किलोग्राम वजन वाले ड्वेन लेवरॉक ने अपनी दाईं ओर शानदार डाइव लगाई और एक हाथ से अविश्वसनीय कैच पकड़ लिया। उनकी इस फुर्ती को देखकर मैदान पर मौजूद खिलाड़ी, दर्शक और कमेंटेटर सभी दंग रह गए। इंग्लैंड के मशहूर कमेंटेटर डेविड लॉयड की —"The big man, the fridge has opened"—आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के बीच मशहूर है। कैच लेने के बाद लेवरॉक का जोशीला जश्न भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

मैच भारत जीता, लेकिन सुर्खियां लेवरॉक ले गए

हालांकि उस मुकाबले में भारत ने बरमूडा को 257 रन के बड़े अंतर से हराया था, लेकिन मैच की सबसे बड़ी चर्चा लेवरॉक का कैच ही बना। उन्होंने गेंदबाजी में युवराज सिंह का विकेट भी लिया, हालांकि उनके 10 ओवरों में 96 रन बने। विडंबना यह रही कि इतनी बड़ी जीत के बावजूद भारतीय टीम टूर्नामेंट के ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई, जबकि श्रीलंका और बांग्लादेश सुपर-8 में पहुंच गए।

बरमूडा के लिए शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर

ड्वेन लेवरॉक ने बरमूडा के लिए 32 वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में 34 विकेट हासिल किए। उनका गेंदबाजी औसत 33.02 रहा। इसके अलावा उन्होंने दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भी खेले। अपने करियर के दौरान साथी खिलाड़ी उन्हें प्यार से श्स्लगोश् कहकर बुलाते थे। भले ही उनका अंतरराष्ट्रीय करियर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन उनकी पहचान हमेशा उस ऐतिहासिक कैच से जुड़ी रही।

अब जेल अधिकारी और क्रिकेट कमेंटेटर

अप्रैल 2009 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद ड्वेन लेवरॉक ने अपने देश बरमूडा में जेल अधिकारी (जेलर) के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके साथ ही वह समय-समय पर पार्ट-टाइम क्रिकेट कमेंट्री भी करते हैं। बरमूडा में आज भी उन्हें खेल जगत की लोकप्रिय हस्तियों में गिना जाता है। क्रिकेट इतिहास में उनका नाम शायद रिकॉर्ड्स के लिए नहीं, बल्कि उस एक अविस्मरणीय कैच के लिए हमेशा याद रखा जाएगा, जिसने यह साबित कर दिया कि जज्बा और फुर्ती का वजन से कोई संबंध नहीं होता।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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