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Singrauli Sub Registrar Dismissed : सिंगरौली में सब-रजिस्ट्रार बर्खास्त, तीन संतान होने पर गई नौकरी

नीरज द्विवेदी

नीरज द्विवेदी

Jun 13, 2026
05:36 AM
सिंगरौली में सब-रजिस्ट्रार बर्खास्त, तीन संतान होने पर गई नौकरी

सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में पदस्थ एक सब-रजिस्ट्रार को दो से अधिक संतान होने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई पंजीयन विभाग के महानिरीक्षक (आईजी) के आदेश पर की गई है। खास बात यह है कि यह आदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दो से अधिक संतान होने पर सरकारी कर्मचारियों की नौकरी नहीं छीनने संबंधी निर्णय के महज 48 घंटे बाद जारी हुआ है।

मामले पर सफाई देते हुए आईजी पंजीयन ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से अभी तक कोई औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है। इसलिए कार्रवाई वर्तमान में लागू नियमों के आधार पर की गई है।

तीन बच्चों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

जानकारी के अनुसार, सिंगरौली में पदस्थ सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार के खिलाफ तीन संतान होने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और विभागीय जांच के आदेश दिए गए।

संयुक्त जांच समिति ने की तीसरे बच्चे की पुष्टि

विभागीय जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक, जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। जांच में पाया गया कि अशोक सिंह परिहार की शासकीय सेवा के दौरान तीन संतानें हुईं। उनके तीसरे पुत्र अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। इसकी पुष्टि कलेक्टर सिंगरौली द्वारा गठित संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजों से हुई।

जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उपलब्ध दस्तावेजों और जांच समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि अशोक सिंह परिहार की तीसरी संतान का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। इसलिए उनके विरुद्ध लगाया गया आरोप सही पाया गया।

सब-रजिस्ट्रार ने दी थी नियमों की जानकारी न होने की दलील

जांच के दौरान अशोक सिंह परिहार ने अपने जवाब में कहा कि उन्हें तीसरी संतान संबंधी नियमों की जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाग की ओर से इस विषय में कोई विशेष दिशा-निर्देश या जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी। साथ ही उन्होंने बताया कि इस मामले में वे पूर्व में भी अपना पक्ष रख चुके हैं।

9 जून को मुख्यमंत्री ने रद्द किया था तीन-संतान संबंधी प्रस्ताव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तैयार उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था।

मुख्यमंत्री ने इस ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के भी निर्देश दिए थे। इस फैसले के बाद दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विभाग ने खारिज किया कर्मचारी का पक्ष

बर्खास्तगी आदेश में कहा गया है कि अशोक सिंह परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे और उनकी तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ। ऐसे में यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।

जांच के दौरान प्रस्तुत समाचार-पत्रों की कटिंग और अन्य दस्तावेजों को भी पर्याप्त साक्ष्य नहीं माना गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि नियमों की जानकारी न होने का तर्क आरोप से मुक्ति का आधार नहीं बन सकता।

क्या कहता है नियम?

10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के अनुसार, यदि किसी शासकीय कर्मचारी की दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से किसी एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 के बाद हुआ है, तो वह शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

जांच में अशोक सिंह परिहार का मामला इसी प्रावधान के अंतर्गत पाया गया, जिसके आधार पर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई।

नीरज द्विवेदी
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नीरज द्विवेदी

5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।

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