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अलीगंज अग्निकांड ने खोली भ्रष्टाचार की परतें : लालच की आग में जलीं 15 जिंदगियां! सिस्टम की नींद ने छीन लिए मासूम सपने

admin

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Jun 23, 2026
04:57 AM
लालच की आग में जलीं 15 जिंदगियां! सिस्टम की नींद ने छीन लिए मासूम सपने

लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। लेकिन आग से भी ज्यादा भयावह वह सच है जो इस त्रासदी के बाद सामने आया है। जांच में पता चला कि जिस इमारत में यह हादसा हुआ, वह मूल रूप से रिहायशी उपयोग के लिए बनाई गई थी, लेकिन वर्ष 2014 में उसे नियमों को दरकिनार कर व्यावसायिक परिसर में बदल दिया गया। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में आज भी यह भवन रिहायशी श्रेणी में दर्ज है।

बिना फायर एनओसी के चल रहा था मौत का कारोबार

सूत्रों के अनुसार, भवन संचालकों ने कभी फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने की जरूरत नहीं समझी। नियमों की खामियों और प्रशासनिक उदासीनता का फायदा उठाकर वर्षों तक यहां कोचिंग सेंटर और अन्य संस्थान संचालित होते रहे। इमारत में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। सबसे बड़ी चूक यह थी कि बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता था, जो आग लगते ही पूरी तरह धुएं और लपटों से घिर गया।

चीखों से कांप उठा इलाका, खिड़कियों से कूदे छात्र

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग धुएं से भर गई। अंदर फंसे छात्र मदद के लिए चीखते रहे। कई छात्र जान बचाने के लिए बाथरूम में छिप गए, जबकि कुछ ने खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश की। एक छात्र ने ऊपरी मंजिल से छलांग लगा दी और नीचे लगी ग्रिल पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में लोग खिड़कियों से लटके और पाइप के सहारे उतरने की कोशिश करते दिखाई दिए।

बाहर रोते रहे परिजन, अंदर मौत से जूझते रहे बच्चे

घटना की सूचना मिलते ही छात्रों के परिजन मौके पर पहुंच गए। बिल्डिंग को आग की लपटों में घिरा देखकर कई परिवारों का सब्र टूट गया। एक मां अपने बेटे को बचाने के लिए पुलिस और अधिकारियों से अंदर जाने की गुहार लगाती रही। उसकी चीखें सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। दूसरी ओर, अंदर फंसे छात्र लगातार मदद की उम्मीद में संघर्ष करते रहे।

रेस्क्यू ऑपरेशन बना रिकवरी मिशन

फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया गया। लेकिन आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर बाद बचाव कार्य शव निकालने की प्रक्रिया में बदल गया। एक-एक कर शव बाहर आने लगे और मौके पर मौजूद परिवारों का दर्द असहनीय हो गया। रेस्क्यू टीमों को अतिरिक्त स्ट्रेचर मंगाने पड़े, जिससे हादसे की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अब कार्रवाई, लेकिन जवाबदेही कौन तय करेगा?

हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। छह नामजद आरोपियों समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और चार गिरफ्तारियां भी हो चुकी हैं। हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है कि जब वर्षों से नियमों की अनदेखी हो रही थी तो जिम्मेदार विभागों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी। क्या केवल सस्पेंशन और गिरफ्तारी से उन 15 परिवारों का दर्द कम हो जाएगा, जिन्होंने अपने बच्चों को हमेशा के लिए खो दिया? अलीगंज अग्निकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब लालच और लापरवाही मिलते हैं, तो उसकी कीमत मासूम जिंदगियों को चुकानी पड़ती है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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