तेल की कीमतों को लेकर पेट्रोलियम मंत्री का बड़ा बयान : उपभोक्ताओं की उम्मीदों को लगा करारा झटका: क्रूड आयल की कीमतें घटी, पर राहत नहीं

नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जल्द कटौती की उम्मीद लगाए बैठे आम उपभोक्ताओं को फिलहाल निराशा हाथ लगी है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में ईंधन की खुदरा कीमतों में कमी का कोई औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले दो-तीन महीनों तक नरम बनी रहती हैं, तभी सरकार और तेल विपणन कंपनियां कीमतों में राहत देने पर विचार कर सकती हैं।
मंत्री ने बताया कि सरकारी तेल विपणन कंपनियों के पास अब भी वह कच्चा तेल और ईंधन भंडार मौजूद है, जिसे वैश्विक बाजार में ऊंची कीमतों पर खरीदा गया था। यही वजह है कि मौजूदा समय में खुदरा कीमतें कम करना व्यावहारिक नहीं है। उनके अनुसार, कंपनियां अभी भी पुराने महंगे स्टॉक का प्रसंस्करण कर रही हैं और पिछले वर्षों के भारी वित्तीय घाटे की भरपाई भी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों पर लगभग 2.18 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ अब भी बना हुआ है।
चार साल में सीमित बढ़ोतरी का दावा
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है। पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 6.23 प्रतिशत की ही वृद्धि हुई है। सरकार का दावा है कि उसने वैश्विक अस्थिरता का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं पडऩे दिया।
तेल कंपनियों को हुआ हजारों करोड़ का नुकसान
मंत्री के मुताबिक, 30 जून तक सरकारी तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर लागत से कम कीमत रखने के कारण करीब 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं, जिससे कंपनियों की लागत में भारी इजाफा हुआ। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आई है, लेकिन उसका असर खुदरा बाजार तक पहुंचने में समय लगेगा।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी जोर दिया है। भारत की तेल शोधन क्षमता को वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 309.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कई नई रिफाइनरी और विस्तार परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से भविष्य में ईंधन आपूर्ति अधिक मजबूत होगी और वैश्विक संकटों का असर भी कम पड़ेगा।
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