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यूपी के रण में मायावती की नई रणनीति : ब्राम्हणों को साधने सतीश चन्द्र मिश्र को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, विरोधी दलों पर साधा निशाना

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 19, 2026
06:45 AM
ब्राम्हणों को साधने सतीश चन्द्र मिश्र को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी, विरोधी दलों पर साधा निशाना

लखनऊ। उत्तर प्रदेश अगले साले होने वाले विधानसभा चुनाव लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कसना शुरू कर दी है। बहुजन समाज पार्टी ने भी अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। बसपा अध्यक्ष मायावती का पूरा फोकस ब्राम्हण समाज को साधने में हैं। इतना ही नहीं, ब्राम्हणों को साधने के लिए मायावती ने बसपा ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश चंद्र मिश्र की जिम्मेदारियां बढ़ाते हुए उन्हें कानूनी और मीडिया संबंधी कार्यों के साथ अब चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी सौंप दी है।

सर्वसमाज को जोड़ने पर जोर

मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बसपा अपने जनाधार को सर्वसमाज में मजबूत करने के लिए अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलनों में उम्मीदवारों के नाम घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। मायावती ने दावा किया कि बसपा की बढ़ती सक्रियता से विरोधी दलों में बेचैनी दिखाई दे रही है।

2007 की रणनीति दोहराने की तैयारी

बसपा प्रमुख ने ब्राह्मण समाज को पार्टी से जोड़ने की रणनीति का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी सर्वसमाज के लोगों को साथ लेकर 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उनके मुताबिक ब्राह्मण समाज के लोगों को पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अन्य दलों में इसे लेकर चर्चा और चिंता बढ़ी है।

कार्यकर्ताओं को किया सतर्क

मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और बहुजन समाज के लोगों से विरोधी दलों के कथित राजनीतिक हथकंडों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में पार्टी के लोगों को किसी भी तरह के भ्रम या रणनीतिक दबाव से सावधान रहने की जरूरत है।

कानूनी और संगठनात्मक अनुभव का मिलेगा लाभ

सतीश चंद्र मिश्र बसपा शासनकाल में उत्तर प्रदेश के महाधिवक्ता और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के कई बार अध्यक्ष तथा कई बार बसपा के राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि उनके कानूनी और चुनावी अनुभव का लाभ 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में मिलेगा।

2027 के लिए बसपा का फोकस साफ

मायावती के ताजा बयान से संकेत है कि बसपा चुनावी रणनीति में संगठन विस्तार, उम्मीदवार चयन और सर्वसमाज को जोड़ने पर विशेष जोर दे रही है। पार्टी की नजर खास तौर पर ऐसे सामाजिक समीकरण तैयार करने पर है, जिसके सहारे वह आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर सके।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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