सरहद से दुश्मन को सख्त संदेश : जोधपुर में गूजेंगी भारत की हवाई ताकत, ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला बड़ा सैन्य अभ्यास, 30 देश दिखाएंगे जौहर

नई दिल्ली। पाकिस्तान सीमा से सटे राजस्थान के जोधपुर में इस वर्ष सितंबर के अंत से भारतीय वायुसेना का अब तक का सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास आयोजित किया जाएगा। 28 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलने वाला 'तरंग शक्ति-2026' अभ्यास ऐसे समय हो रहा है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद होने वाला यह पहला बड़ा सैन्य अभ्यास माना जा रहा है, जिससे भारत अपनी सामरिक क्षमता और वैश्विक सहयोग का प्रदर्शन करेगा।
सीमा के पास रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन
जोधपुर वायुसेना स्टेशन अपनी सामरिक स्थिति और विशाल आधारभूत सुविधाओं के कारण इस अभ्यास के लिए चुना गया है। रेगिस्तानी इलाका वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त माना जाता है। पाकिस्तान सीमा के निकट होने से यह अभ्यास भारत की सतर्कता और किसी भी चुनौती का जवाब देने की तैयारी का स्पष्ट संकेत भी माना जा रहा है।
30 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद
भारतीय वायुसेना के इस बड़े आयोजन में 30 से अधिक देशों की वायु सेनाओं के शामिल होने की संभावना है। वर्ष 2024 में हुए पहले संस्करण में भी कई मित्र देशों ने हिस्सा लिया था। इस बार अभ्यास का दायरा और बड़ा होगा, जिसमें संयुक्त अभियान, समन्वित उड़ानें और आधुनिक युद्ध तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इससे विभिन्न देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और सामरिक सहयोग को मजबूती मिलेगी।
आधुनिक युद्ध तकनीकों का होगा अभ्यास
अभ्यास के दौरान हवा में ईंधन भरने, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के संचालन, निगरानी विमानों और आधुनिक संचार प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित लक्ष्य पहचान और साइबर हमलों जैसी नई चुनौतियों से निपटने की रणनीतियों का भी अभ्यास होगा। इससे भारतीय वायुसेना को भविष्य के युद्ध परिदृश्यों के अनुरूप अपनी क्षमता और अधिक मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
सामरिक साझेदारी और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल
यह अभ्यास केवल सैन्य प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग को भी नई मजबूती देगा। भारतीय रक्षा उपकरणों और स्वदेशी तकनीक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, जिससे रक्षा निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन भारत की बढ़ती हवाई शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता और वैश्विक सुरक्षा में उसकी सक्रिय भूमिका का प्रभावी प्रदर्शन होगा।
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