कानूनी घेरे में आगर मालवा पुलिस की कार्रवाई : झालावाड़ कोर्ट के आदेश पर थाना प्रभारी समेत 100 पर एफआईआर, जानें क्या है पूरा मामला

आगर मालवा। झालावाड़ जिले की चौमहला कोर्ट के सख्त हस्तक्षेप के बाद मध्य प्रदेश के आगर मालवा पुलिस की एक बड़ी कार्रवाई अब कानूनी घेरे में आ गई है। कोर्ट के आदेश के बाद आगर कोतवाली के तत्कालीन थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूपसिंह बैस, उप निरीक्षक राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट सहित करीब 100 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
यह पूरा मामला 28 जनवरी 2026 का बताया जा रहा है, जब आगर मालवा पुलिस ने राजस्थान के झालावाड़ जिले के डग थाना क्षेत्र के घाटाखेड़ी गांव में छापेमारी की कार्रवाई की थी। पुलिस ने उस दौरान करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ (एमडी) और अन्य सामग्री की बरामदगी का दावा किया था। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बिना समन्वय और प्रक्रिया पर उठे सवाल
परिवाद के अनुसार, आगर पुलिस ने कथित तौर पर स्थानीय डग पुलिस को पूरी जानकारी दिए बिना गांव में कार्रवाई की। केवल मोबाइल पर सूचना देने की बात सामने आई, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कार्रवाई किस स्थान पर और किस उद्देश्य से की जा रही है। आरोप है कि इस दौरान घरों में तोड़फोड़ और महिलाओं से अभद्रता भी की गई।
जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं उजागर
कोर्ट द्वारा कराई गई जांच में कई अहम विसंगतियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस द्वारा की गई जब्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे। साथ ही, जिस वीडियोग्राफी का दावा किया गया था, उसके भी ठोस साक्ष्य नहीं मिले। सीसीटीवी फुटेज में यह भी पाया गया कि पुलिस वाहन गांव में लगभग 30 मिनट ही रुके थे, जबकि इतनी कम अवधि में एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया का पूरा होना संदिग्ध माना गया।
पीड़ित पक्ष के गंभीर आरोप, पैसे की मांग का दावा
इस्तगासे में पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि राशि देने में असमर्थता जताने पर दोनों व्यक्तियों को आगर थाने ले जाया गया और बाद में उन पर भारी मात्रा में मादक पदार्थ रखने का केस दर्ज कर दिया गया। जबकि बाद में उनके घरों की तलाशी में केवल सीमित वस्तुएं ही मिलीं, जिनमें लाइसेंसी हथियार और कुछ मोबाइल शामिल थे, लेकिन कथित भारी मात्रा में ड्रग्स नहीं मिला।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुआ मामला, जांच पर नजर
चौमहला कोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले में थ्प्त् दर्ज हो चुकी है और पुलिसकर्मी जांच के दायरे में हैं। इस घटना ने मध्य प्रदेश और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई नियमों के तहत थी या इसमें अनियमितताएं हुई थीं।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
