बामुलाहिजा : शहनाई के किस्से... समीक्षा बैठक में क्या हुआ? और बीजेपी की पिच पर दिग्गी का शॉट...

बामुलाहिजा : संदीप भम्मरकर
शहनाई में ‘पेट्रोल फ्रेंडशिप’!
फग्गन सिंह कुलस्ते के घर शहनाई बजी तो सियासत के कई दिग्गज आशीर्वाद देने पहुंच गए। पड़ोसी राज्य के एक मुख्यमंत्री भी हेलीकॉप्टर से मंडला में उतरे, लेकिन लैंडिंग के साथ एविएशन स्टाफ की धड़कनें बढ़ गईं। पता चला, लौटने के लिए पेट्रोल का हिसाब ही गड़बड़ा गया है। फिर एमपी सीएम स्टाफ ने मेहमाननवाज़ी निभाई और वक्त रहते इंतजाम कर दिया। मामला संभल गया, मगर गलियारों में सवाल उड़ने लगे… अगर पेट्रोल फ्रेंडशिप नहीं होती तो आसमान में भारी मुसीबत आ सकती थी, तब जिम्मेदारी किसकी होती?
शहनाई की तैयारी में अफसरशाही
सूबे के एक बड़े नेता के घर शहनाई क्या बजने वाली है, पूरा अमला “वेडिंग मोड” में चला गया है। खबर है कि हर जिले के अफसरों को श्रमदान का टारगेट मिला है। इंदौर और भोपाल के दो बड़े अफसर पूरी तैयारियों के कमांडर बने हुए हैं। मंडप से मेहमाननवाज़ी तक का गणित अफसरशाही सुलझा रही है। हाल ये है कि फाइलें किनारे पड़ी हैं और विभागों में इन दिनों सबसे बड़ा मिशन “टारगेट अचीव” करना बन गया है। ऊपर से रोजाना अपडेट भी लिया जा रहा है… यानी शादी निजी है, मगर तैयारी पूरी सरकारी!
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सालगिरह पर रॉयल जश्न के चर्चे
शादी का सीजन चल रहा है, लेकिन यहां शहनाई 25 साल बाद फिर बज रही है। पुलिस विभाग के एक इंस्पेक्टर साहब अपनी शादी की सिल्वर जुबली ऐसे मना रहे हैं, जैसे कोई रॉयल वेडिंग हो। दो-दो रिसोर्ट बुक, मेहंदी-हल्दी-संगीत की धूम और इंतजाम ऐसे कि बड़े अफसर भी चौंक जाएं। कुर्सी भले इंस्पेक्टर की हो, लेकिन जलवे किसी वीआईपी दरबार से कम नहीं। वैसे साहब के बंगले के चर्चे पहले से ही गलियारों में तैरते रहे हैं। अब लोग कह रहे हैं… “25 साल की शादी है या पावर का सार्वजनिक प्रदर्शन?”
समीक्षा बैठक में ‘माफिया मोमेंट’!
मंत्रालय की समीक्षा बैठक में उस वक्त सन्नाटा जम गया, जब मिनिस्टर मैडम ने अवैध शराब पर चर्चा करते-करते अपने ही जिले के मंत्रीजी का ऐसा ज़िक्र कर दिया, मानो किसी शराब माफिया की फाइल खुल गई हो। मामला ड्राइ स्टेट से लगे जिले का था, इसलिए माहौल पहले ही गंभीर था। लेकिन मैडम के शब्दों ने कमरे का तापमान और बढ़ा दिया। अफसरों ने तुरंत अपनी नजरें फाइलों में गड़ा लीं, जैसे कुछ सुना ही न हो। मगर सबने महसूस कर लिया… पार्टी की ही मिनिस्टर मैडम ने मामला छेड़ा है तो ये बवाल भी मचा सकता है।
मिनिस्टरों की शिकायत सभा
सीएम की समीक्षा बैठक में इस बार विभागों से ज्यादा दुख-दर्द की फाइलें खुलीं। मंत्रियों ने परफॉर्मेंस रिपोर्ट कम और शिकायत पत्र ज्यादा पेश किए। किसी ने अफसरों की अनदेखी गिनाई, तो किसी ने लोकल नेताओं की खींचतान का हिसाब खोला। कई मंत्रियों ने तो नाम लेकर बताया कि कौन नेता उनकी राह में स्पीड ब्रेकर बना हुआ है। माहौल ऐसा था, जैसे समीक्षा बैठक नहीं, “शिकायत निवारण शिविर” चल रहा हो। वजह भी साफ है… सबको पता है कि परफॉर्मेंस बिगड़ी तो कुर्सी का बैलेंस भी बिगड़ सकता है।
बीजेपी की पिच पर दिग्गी का शॉट!
सियासत में कभी-कभी एक वीडियो पूरी कहानी पलट देता है। इस बार चर्चा में हैं दिग्विजय सिंह और बीजेपी की फायरब्रांड नेता ऊषा ठाकुर के बीच संवाद का वीडियो। बीजेपी सोशल मीडिया जहां दिग्विजय को “चचाजान” कहकर घेरती रही, वहीं ऊषा ठाकुर ने खुले मंच से उन्हें सनातनी बता दिया। बस फिर क्या था… वीडियो वायरल और गलियारों में कानाफूसी शुरू। दोनों नेताओं के बीच आत्मीयता से ज्यादा “सनातनी सर्टिफिकेट” सुर्खियां बटोर ले गया। अब चर्चा ये है कि क्या दिग्गी राजा बीजेपी की पिच पर नया शॉट खेल रहे हैं… और उनके करीबी उसी का ट्रेलर वायरल कर रहे हैं?
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