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मप्र सरकार में बड़े बदलाव के संकेत : राज्यमंत्रियों की बढ़ेगी ताकत, विभागों में मिलेगा अधिक अधिकार, सत्ता-संगठन की समीक्षा बैठक में मंथन

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May 18, 2026
10:17 AM
राज्यमंत्रियों की बढ़ेगी ताकत, विभागों में मिलेगा अधिक अधिकार, सत्ता-संगठन की समीक्षा बैठक में मंथन

भोपाल। मप्र की मोहन सरकार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। दरअसल प्रदेश सरकार में राज्यमंत्रियों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई दो दिवसीय सत्ता और संगठन समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई कि जिन विभागों में कैबिनेट मंत्रियों के साथ राज्यमंत्री कार्यरत हैं, वहां राज्यमंत्रियों के अधिकारों का दायरा बढ़ाया जाए।

बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव के लागू होने के बाद राज्यमंत्रियों को केवल सीमित कार्यों तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें विभागीय निर्णयों में अधिक सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। इसके तहत उन्हें वर्तमान जिम्मेदारियों के साथ-साथ अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकार भी सौंपे जाने पर विचार किया गया है। इसका उद्देश्य शासन व्यवस्था को अधिक तेज, प्रभावी और विकेंद्रीकृत बनाना बताया जा रहा है।

राज्य मंत्री होंगे अधिक पाॅवरफुल

सूत्रों के मुताबिक जिन राज्यमंत्रियों को सबसे अधिक लाभ मिल सकता है, उनमें स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी और पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। फिलहाल इन मंत्रियों को विभागों में सीमित कार्य ही सौंपे गए हैं, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने पर उनकी भूमिका में उल्लेखनीय विस्तार देखने को मिल सकता है।

बदलाव के बाद मिलेगी अधिक भागीदारी

अभी की स्थिति में कुछ राज्यमंत्रियों को केवल तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों जैसे सीमित प्रशासनिक अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद उन्हें विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और प्रशासनिक फैसलों में भी अधिक भागीदारी मिल सकती है।

अहम बैठक में शामिल हुए दिग्गज

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। बैठक में संगठन और सरकार के समन्वय को मजबूत करने तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो मध्य प्रदेश की प्रशासनिक संरचना में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा, जिससे न केवल राज्यमंत्रियों की भूमिका बढ़ेगी बल्कि विभागीय कार्यों की गति भी तेज होने की उम्मीद है।

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