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उद्धव बनाम शिंदे : बागी सांसदों पर भड़के संजय राउत, बिकने का लगाया गंभीर

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 19, 2026
09:33 AM
बागी सांसदों पर भड़के संजय राउत, बिकने का लगाया गंभीर

मुंबई। शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी एक बार फिर बड़े राजनीतिक संकट में घिर गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट में उस समय हलचल मच गई जब छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में जाने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम पर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। साथ ही बागी सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह कोई वैचारिक विभाजन नहीं बल्कि “राजनीतिक सौदेबाजी” का मामला है। राउत ने दावा किया कि कुछ सांसदों ने कैबिनेट और पदों की लालच में पार्टी छोड़ी और इसके लिए कथित तौर पर अंदरूनी समझौते और वित्तीय लेन-देन की बात भी सामने आई।

“बाजार में लगाई गई कीमत” वाला बयान और बढ़ता विवाद

संजय राउत ने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि सांसदों ने खुद को “बाजार में खड़ा कर कीमत लगवाई” और फिर दूसरी ओर चले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय किसी विचारधारा या जनसेवा के कारण नहीं बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए लिया गया। राउत ने यह भी दावा किया कि इस पूरे विवाद को शांत करने के लिए देर रात कुछ समझौते किए गए और आने वाले समय में अतिरिक्त वित्तीय लाभ देने की बातें सामने आईं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

सुरक्षा और राजनीति पर सवाल

राउत ने यह भी सवाल उठाया कि बागी सांसदों को भारी पुलिस सुरक्षा क्यों दी जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन सुरक्षा “राजनीतिक बागियों” को दी जा रही है। उन्होंने भाजपा पर भी हमला बोलते हुए कहा कि विपक्षी दलों के टूटने पर जो लोग खुशी मनाते हैं, वे खुद भी आंतरिक अस्थिरता से अछूते नहीं हैं।

शिवसेना में गहराता संकट

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ठाकरे गुट ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है और अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनकी संसदीय सदस्यता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिवसेना के दोनों गुटकृउद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर अपनी-अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, जिससे पार्टी की अंदरूनी दरार एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है।

आगे की सियासी राह

महाराष्ट्र की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और अधिक तनाव पैदा कर सकता है। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिवसेना की असली दिशा और नेतृत्व किसके हाथ में है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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