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मुल्ला अफरोज की एनएसएस हिरासत रद्द : संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, यूपी सरकार पर लगा 10 लाख का जुर्माना

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 29, 2026
07:47 AM
संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, यूपी सरकार पर लगा 10 लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। संभल हिंसा से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी निरस्त कर दिया है जिसमें मुल्ला अफरोज को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में रखने का आदेश दिया गया था। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी का कबूलनामा उसे नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (एनएसए) के तहत हिरासत में रखने का आधार नहीं हो

पुलिस हिरासत के कथित बयान पर उठाया सवाल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में यह अहम बात सामने आई कि किसी व्यक्ति को एनएसए के तहत निवारक हिरासत में रखने का आधार केवल पुलिस हिरासत में दिया गया कथित कबूलनामा नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर राज्य सरकार की कार्रवाई को कानून के अनुरूप नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी को अन्य संबंधित परिस्थितियों पर भी विचार करना चाहिए। कोर्ट ने पाया कि अफरोज के मामले में अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया और अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया।

संभल हिंसा से जुड़ा है मामला

बता दें कि मुल्ला अफरोज पर नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में आरोप लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश सरकार ने उसकी हिरासत का बचाव करते हुए सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका का हवाला दिया था। सरकार की ओर से अदालत के समक्ष मामले से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों और जांच सामग्री का भी उल्लेख किया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर भी असर

सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द करने के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को भी सेट aside कर दिया, जिसने हिरासत को बरकरार रखा था। शीर्ष अदालत के फैसले के बाद निवारक हिरासत से जुड़ा यह आदेश प्रभावी नहीं रहेगा।

यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च

अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का खर्च लगाया। फैसले में निवारक हिरासत की शक्ति के इस्तेमाल को लेकर गंभीर कानूनी आपत्तियां दर्ज की गईं। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निवारक हिरासत के लिए आवश्यक कानूनी आधार से जुड़े सवालों के संदर्भ में आया है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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