क्रीमी लेयर तय करने में नहीं जुड़ेगी माता-पिता की आय : ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, केन्द्र सरकार की याचिका खारिज

नई दिल्ली। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने क्रीमी लेयर के निर्धारण से जुड़े मामले में केंद्र सरकार की संशोधन याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसका फैसला इस मामले में शामिल पक्षों पर ही लागू होगा। लंबित मामलों पर संबंधित अदालते अपने-अपने तथ्यों और पात्रता के आधार पर फैसला करेंगी। इसके लिए माता-पिता के पदों की श्रेणी पर भी विचार करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ओबीसी क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता की वेतन से होने वाली आय को शामिल नहीं किया जाएगा। इसके बजाय माता-पिता की सरकारी सेवा में स्थिति और उनके पद को आधार बनाया जाएगा। इस फैसले से ओबीसी आरक्षण के पात्रता नियमों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति साफ हुई है।
क्रीमी लेयर का आधार आय नहीं, माता-पिता का पद
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को शारत सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि क्रीमी लेयर का निर्धारण पूरी तरह आय आधारित नहीं, बल्कि पद और सामाजिक स्थिति आधारित है। इसमें माता-पिता की सेवा श्रेणी यानी समूह ए, बी, सी या डी में उनका पद महत्वपूर्ण होता है।
8 लाख रुपये की सीमा को लेकर क्या है नियम?
आमतौर पर माना जाता है कि सालाना 8 लाख रुपये से अधिक आय होने पर उम्मीदवार क्रीमी लेयर में आ जाता है। हालांकि, वर्ष 1993 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार वेतन और कृषि से होने वाली आय को इस सीमा की गणना से बाहर रखा गया है। यानी केवल माता-पिता की वेतन आय के आधार पर किसी उम्मीदवार को क्रीमी लेयर में नहीं रखा जा सकता।
केंद्र सरकार ने फैसले को भविष्य से लागू करने की मांग की थी
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संशोधन याचिका दाखिल कर मांग की थी कि 11 मार्च के फैसले को पिछली तारीख से लागू करने के बजाय भविष्य से प्रभावी किया जाए। सरकार का तर्क था कि यदि फैसला वर्ष 2012 से लागू हुआ तो अब तक हुई सरकारी नियुक्तियों, सेवा आवंटन और वरिष्ठता सूचियों में बदलाव करना पड़ सकता है।
इसका असर भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा सहित कई सेवाओं के अधिकारियों पर पड़ सकता है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई थी।
प्रफुल्ल तिवारी
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