बुधवार, 24 जून 202608:29:57 PM
Download App
Home/देश

24 घंटे एक बार सूखी रोटी, विरोध करने पर बेरहमी से पिटाई : मजदूर की हिम्मत से खुला बंधुआ मजदूरी का राज, प्रशासन ने दिलाई राहत

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 24, 2026
09:54 AM
मजदूर की हिम्मत से खुला बंधुआ मजदूरी का राज, प्रशासन ने दिलाई राहत

लखनऊ-मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बंधुआ मजदूरी के संगठित गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यहां पर एक झोला निर्माण फैक्ट्री में बीते दो साल से 13 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा गया था। इतना ही नहीं इन मजदूरों ने दो साल तक नरक जैसी जिंदगी जी है। एक जहां इन्हें खाने के नाम पर सूखी रोटी दी जाती थी, वहीं दूसरी ओर भागने की कोशिश करने पर कोड़ो से पिटाई भी की जाती थी। हालांकि अब इन्हें इस प्रताड़ना से मुक्ति मिल गई है। श्रम विभाग और जिला प्रशासन की टीम ने इन्हें मुक्त करा लिया है। अधिकारियों ने छापेमारी कर सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें राहत पहुंचाई।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री की कड़ी निगरानी से बचकर भाग निकला और स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। उसकी सूचना के बाद प्रशासन हरकत में आया और फैक्ट्री पर तत्काल छापा मारा गया।

नौकरी और अच्छी तनख्वाह का झांसा देकर बनाया बंधुआ मजदूर

पीड़ित मजदूरों ने बताया कि उन्हें अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी का लालच देकर अलग-अलग राज्यों से मुजफ्फरनगर लाया गया था। लेकिन फैक्ट्री पहुंचते ही उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए। इसके बाद उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिया गया, ताकि वे अपने परिवारों से संपर्क न कर सकें। मजदूरों ने बताया कि फैक्ट्री के चारों तरफ ऊंची दीवारें थीं और परिसर में दो खूंखार पिटबुल कुत्ते छोड़े गए थे, जिससे कोई भी मजदूर भागने की हिम्मत नहीं कर पाता था।

24 घंटे में एक बार सूखी रोटी, विरोध करने पर बेरहमी से पिटाई

पीड़ितों के अनुसार, उन्हें मजदूरी का कोई भुगतान नहीं किया जाता था। खाने के नाम पर हर 24 घंटे में सिर्फ एक बार सूखी रोटी दी जाती थी। यदि कोई मजदूर विरोध करता या भागने की कोशिश करता, तो उसे लाठियों और कोड़ों से बेरहमी से पीटा जाता था।

रेस्क्यू के दौरान कई मजदूरों के शरीर पर चोट और मारपीट के गहरे निशान पाए गए। पुलिस ने मौके से लाठियां और अन्य आपत्तिजनक सामान भी बरामद किया है।

कई राज्यों और नेपाल से लाए गए थे मजदूर, दो आरोपी गिरफ्तार

मुक्त कराए गए मजदूरों में रामू, विक्रम, नारायण, सीताराम, संतोष, शिवम जाटव, जगदीश, राजहंस, साहिल, रंजीत पासवान, दिलशाद, उज्ज्वल और सोनू चैहान शामिल हैं। ये मजदूर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से लाए गए थे।

पुलिस ने मामले में दो मुख्य आरोपियों शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि लंबे समय तक बंधक बनाए जाने के दौरान किसी मजदूर की मौत तो नहीं हुई।

मेडिकल जांच के बाद घर भेजने की तैयारी

रेस्क्यू के बाद सभी मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत कर उन्हें सुरक्षित उनके घर भेजने की व्यवस्था की है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध बंधुआ मजदूरी रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

प्रफुल्ल तिवारी
Written By

प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें