नेपाल में भोटेकोशी का रौद्र रूप! : 163 मौतें, 750 से ज्यादा लापता, फ्लैश फ्लड ने मचाई भीषण तबाही, मलबे में तब्दील हुईं बस्तियां, 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज बहे; 139 भारतीय नागरिक भी अब तक लापता

नई दिल्ली। नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी का रौद्र रूप देखकर हर कोई दहशत में है। अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को तबाही के मंजर में बदल दिया। तेज बहाव अपने साथ घर, वाहन, सड़कें और पुल तक बहा ले गया। इस विनाशकारी फ्लैश फ्लड में अब तक करीब 163 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव दल लगातार मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं।
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 35 पुल और 45 सस्पेंशन ब्रिज पूरी तरह बह गए हैं। कई इलाकों का सड़क संपर्क टूट चुका है। बाढ़ के तेज बहाव में बड़ी संख्या में वाहन भी फंस गए या बह गए। संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने से राहत अभियान में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
13 जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान
प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी बड़ा झटका दिया है। बाढ़ की चपेट में आने से 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। कई जगह सड़कों पर कीचड़ और मलबे की मोटी परत जमा हो गई है। घर या तो पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं या पानी और मलबे में घिरे हुए हैं। नेपाल सेना और राहत टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं। सेना ने अब तक 250 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है। जेसीबी मशीनों, रस्सियों और स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। बुजुर्गों, बच्चों और अन्य फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना प्राथमिकता बनी हुई है।

139 भारतीय नागरिक भी लापता
नेपाल की इस आपदा में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 139 भारतीय नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु और अन्य पर्यटक भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कई पर्यटक भी इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और लापता लोगों की जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मौत का आंकड़ा चितवन में सबसे ज्यादा
नेपाल में अब तक बरामद 163 शवों में सबसे ज्यादा 64 शव चितवन से मिले हैं। इसके अलावा धादिंग में 27, नवलपरासी पूर्व में 26, गोरखा में 20, नुवाकोट में 12, तनहु में 9, रसुवा में 3 और नवलपरासी पश्चिम में 2 शव बरामद हुए हैं। 750 से अधिक लोगों के लापता होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। राहत दल लगातार नए इलाकों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

भूस्खलन के बाद आई विनाशकारी बाढ़
अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण के अनुसार, यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए एक बड़े भूस्खलन के बाद शुरू हुई। इस भूस्खलन से 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के बराबर सीस्मिक संकेत पैदा हुए। माना जा रहा है कि भूस्खलन के दौरान ग्लेशियर का एक हिस्सा भी ढह गया, जिसके बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और पानी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेन्डे खोला में जा मिला। अचानक पानी का दबाव बढ़ने से फ्लैश फ्लड ने निचले इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते बस्तियां मलबे में बदल गईं।
बिहार-यूपी में भी अलर्ट
नेपाल की इस भीषण आपदा के बाद भारत में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार में गंडक, नारायणी और कोसी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। महाराजगंज और कुशीनगर समेत उत्तर प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है। बिहार के छह जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्रालय समेत केंद्र सरकार के कई मंत्रालय नेपाल की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

पीएम मोदी ने दिया मदद का भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर इस मुश्किल घड़ी में हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत के लोग नेपाल के अपने भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। चारों तरफ तबाही, मलबा और लापता लोगों के बीच परिवार अपने अपनों की तलाश में जुटे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के कटे हुए इलाकों तक पहुंचना और मलबे में फंसी जिंदगियों को बचाना है।
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