कुदरत की मार से काठमांडु से देवघाट तक हाहाकार : भोटेकोशी-त्रिशूली-नारायणी में सैलाब ने मचाई भारी तबाही

काठमांडु, नेपाल। नेपाल में बुधवार सुबह कुदरत ने ऐसी तबाही मचाई कि भोटेकोशी से लेकर त्रिशूली और नारायणी नदी के तटीय इलाकों तक हाहाकार मच गया। तिब्बत की ओर नदी का बहाव रुकने से बनी झील के टूटने के बाद अचानक आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ का वेग इतना खतरनाक था कि चार स्वचालित जलमापन केंद्र तक पानी में बह गए और कई स्थानों पर नदी का वास्तविक जलस्तर मापना तक संभव नहीं रहा।
भूकंप के बाद अचानक आया सैलाब
नेपाल के जल विज्ञान अनुसंधान केंद्र की बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा की तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अगस्त की सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसके कुछ ही देर बाद तिब्बत की ओर से भोटेकोशी नदी में अचानक भारी बाढ़ आने की सूचना मिली। महज कुछ मिनटों में हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन और बाढ़ पूर्वानुमान अधिकारियों को नदी किनारे रहने वाली आबादी को बड़े पैमाने पर चेतावनी जारी करनी पड़ी।
8:50 बजे बंद हुआ पहला जलमापन केंद्र
सुबह 8:50 बजे रसुवा के स्याफ्रुबेँसी जलमापन केंद्र से आंकड़े मिलना बंद हो गए। उस समय अंतिम जलस्तर 1.62 मीटर दर्ज किया गया था। करीब 9 बजे रसुवा जिला प्रशासन और बेत्रावती जलमापन केंद्र से भोटेकोशी में आई भयावह बाढ़ की सूचना मिली। इसके बाद सुबह 9:15 से 9:16 बजे के बीच मुग्लिन तक त्रिशूली नदी के तटीय क्षेत्रों के लिए उच्च-सतर्कता संदेश जारी किए गए।
6.79 लाख एसएमएस से लोगों को किया अलर्ट
नेपाल टेलिकॉम और एनसेल के सहयोग से रसुवा, नुवाकोट, धादिङ और चितवन के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को कुल 6 लाख 79 हजार 295 चेतावनी एसएमएस भेजे गए। इनमें नेपाल टेलिकॉम के 4 लाख 35 हजार 635 और एनसेल के 2 लाख 43 हजार 660 संदेश शामिल थे। समय रहते मिली चेतावनी के कारण बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का मौका मिला।
सैलाब ने तोड़े खतरे के निशान
लेकिन बाढ़ लगातार विकराल होती गई। सुबह 9:20 बजे बेत्रावती जलमापन केंद्र ने भी काम करना बंद कर दिया। इसका अंतिम जलस्तर 3.55 मीटर दर्ज हुआ था। सुबह 10:28 बजे सैलाब धादिङ-गल्छी क्षेत्र तक पहुंच गया, जिसके बाद पृथ्वी राजमार्ग, मुग्लिन-नारायणगढ़ सड़क और त्रिशूली किनारे बसे इलाकों के लिए दोबारा चेतावनी जारी की गई।
सुबह 11:26 बजे मलेखु के फुर्केखोला जलमापन केंद्र पर पानी चेतावनी सीमा से ऊपर पहुंच गया। महज 17 मिनट बाद, 11:43 बजे, जलस्तर खतरे की सीमा पार कर गया और कुछ ही समय में पुल सहित जलमापन केंद्र बाढ़ में बह गया। 11:50 बजे सैलाब मलेखु बाजार के आसपास पहुंच गया।
मुग्लिन के बाद देवघाट तक पहुंची तबाही
दोपहर 1 बजे बाढ़ मुग्लिन बाजार को पार कर चुकी थी। इसके बाद भी खतरा खत्म नहीं हुआ। दोपहर 2:14 बजे कालीखोला जलमापन केंद्र पर पानी 12.1 मीटर की खतरे की सीमा को पार कर 12.3 मीटर के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। दोपहर 3:20 बजे बाढ़ नारायणी-देवघाट क्षेत्र में दाखिल हुई।
देवघाट में 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी
शाम 4 बजे देवघाट जलमापन केंद्र पर जलस्तर 6.57 मीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा और इसके बाद धीरे-धीरे घटने लगा। शाम 6:30 बजे तक नदी का बहाव करीब 4 मीटर के सामान्य स्तर के आसपास लौट आया। तकनीकी आकलन के अनुसार, बाढ़ की पूरी अवधि में केवल देवघाट से करीब 2 करोड़ घनमीटर अतिरिक्त पानी बहने का अनुमान है।
चार जलमापन केंद्र बाढ़ में पूरी तरह बह गए
इस विनाशकारी बाढ़ में रसुवा भोटेकोशी, रसुवा स्याफ्रुबेँसी, नुवाकोट बेत्रावती और धादिङ मलेखु (फुर्के) के चार जलमापन केंद्र पूरी तरह बह गए। इनमें से कुछ केंद्र पुल सहित बाढ़ में बह गए। केंद्रों के नष्ट होने के कारण संबंधित क्षेत्रों से प्रत्यक्ष जलस्तर का आंकड़ा प्राप्त नहीं हो सका। रिपोर्ट में रसुवागढ़ी सीमा से नेपाल-भारत सीमा तक के इलाकों को अति उच्च, उच्च और मध्यम जोखिम वाले क्षेत्रों में बांटकर लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
कुदरत का रौद्र रूप, पीछे छोड़ गया तबाही के निशान
भूकंप के कुछ ही समय बाद आई इस अचानक बाढ़ ने एक बार फिर दिखा दिया कि पहाड़ी नदियों के आसपास रहने वाले इलाकों में प्राकृतिक आपदा कितनी तेजी से विनाशकारी रूप ले सकती है। चेतावनी प्रणाली ने कई लोगों की जान बचाने में मदद की, लेकिन नदी का रौद्र रूप अपने पीछे भारी नुकसान और तबाही के निशान छोड़ गया।
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