जर्मनी को हराकर बेटियों ने रचा नया इतिहास : 52 साल बाद फिर विश्व हॉकी में चमका भारत, 11 खिलाड़ियों ने पहली बार दिखाया दम

एम्स्टेलवीन। भारतीय महिला हॉकी टीम ने जर्मनी को 3-1 से हराकर विश्व कप अभियान का शानदार अंत किया। पांचवें स्थान की यह जीत भले ही आंकड़ों में एक क्लासिफिकेशन मैच की सफलता नजर आए, लेकिन भारतीय हॉकी के लिए इसका महत्व बेहद बड़ा है। 1974 के उद्घाटन विश्व कप में चैथे स्थान के बाद यह भारत का अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यानी 52 साल के लंबे अंतराल के बाद भारतीय महिला टीम ने एक बार फिर विश्व कप के शीर्ष पांच में जगह बनाई है।
भारतीय टीम की इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा टीम की 11 खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में खेल रही थीं। इसके बावजूद भारत ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक मुकाबला गंवाया और वह भी मजबूत मेजबान तथा ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड्स के खिलाफ 0-2 से।
भारत ने अपने अभियान की शुरुआत चीन के खिलाफ 2-2 के ड्रॉ से की। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से करारी शिकस्त दी। इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ रहा, जबकि ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध टीम ने गोलरहित बराबरी हासिल की। नतीजों से ज्यादा इन मुकाबलों में भारतीय टीम का आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मक तेवर नजर आया।
आखिरी 17 मिनट में बदली मैच की तस्वीर
जर्मनी के खिलाफ मुकाबला लंबे समय तक बेहद संघर्षपूर्ण रहा। 43 मिनट तक दोनों टीमें गोल के लिए जूझती रहीं। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अचानक आक्रामक रफ्तार पकड़ ली। 43वें मिनट में ईशिका ने शानदार रिवर्स हिट के जरिए भारत को बढ़त दिलाई। इसके बाद नवनीत कौर ने महज तीन मिनट के भीतर दो गोल दागकर जर्मनी की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया। पहले उन्होंने पेनल्टी कॉर्नर पर श्टच एंड स्लैपश् तकनीक से गोल किया और फिर बेहतरीन ड्रिब्लिंग के बाद तीसरा गोल दाग दिया।
डिफेंस ने भी दिखाया दम
जर्मनी को छह पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय गोलकीपर बिचू देवी और डिफेंस ने हर चुनौती का डटकर सामना किया। जर्मनी को सिर्फ एक गोल से संतोष करना पड़ा। खास बात यह रही कि जिस जर्मन टीम ने विश्व कप से पहले अभ्यास मुकाबलों में भारत को हराया था, उसी के खिलाफ भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबले में शानदार वापसी की।
अब एशियाई खेलों पर निगाहें
इस ऐतिहासिक अभियान के बाद भारत की नजरें अब एशियाई खेलों पर हैं। विश्व कप में पांचवें स्थान ने टीम को आत्मविश्वास दिया है, लेकिन असली चुनौती इस प्रदर्शन को पदक में बदलने की होगी। 11 युवा खिलाड़ियों को बड़े मंच का अनुभव मिल चुका है। ऐसे में भारतीय महिला हॉकी के लिए यह विश्व कप अंत नहीं, बल्कि एक नई और उम्मीद भरी शुरुआत बनकर सामने आया है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
