शनिवार, 9 मई 202611:30:09 AM
Download App
Home/ख़बरे

भोपाल 90 डिग्री ब्रिज केस : सस्पेंड किए गए सभी 7 इंजीनियर बहाल, तीन अधिकारियों पर जारी रहेगी विभागीय जांच

आलोक त्रिपाठी

आलोक त्रिपाठी

May 09, 2026
09:15 AM
सस्पेंड किए गए सभी 7 इंजीनियर बहाल, तीन अधिकारियों पर जारी रहेगी विभागीय जांच

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के चर्चित ‘90 डिग्री ब्रिज’ मामले में राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने सस्पेंड किए गए सभी 7 इंजीनियरों को बहाल कर दिया है। इनमें दो तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं। पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह के प्रस्ताव पर मंत्री राकेश सिंह ने बहाली को मंजूरी दी है।

जानकारी के मुताबिक, इन सभी अधिकारियों को 23 जून 2025 को निलंबित किया गया था। अब बहाली के बाद इन्हें ईएनसी ऑफिस में पदस्थ किया जाएगा। हालांकि मामले में कुछ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी।

तीन अधिकारियों पर जारी रहेगी जांच

पीडब्ल्यूडी ब्रिज डिवीजन से जुड़े तत्कालीन प्रभारी चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा, अनुविभागीय अधिकारी रवि शुक्ला और उपयंत्री उमाशंकर मिश्रा के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। इन अधिकारियों पर निर्माण कार्य में लापरवाही और तकनीकी त्रुटियों के आरोप हैं।

वहीं डिजाइन विंग से जुड़े प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय खांडे, प्रभारी ईई शबाना रज्जाक और सहायक यंत्री शानुल सक्सेना को बिना विभागीय जांच के बहाल किया गया है। विभाग का कहना है कि आरोप-पत्र के जवाब में इन अधिकारियों ने डिजाइन संबंधी गलती से इनकार किया था और जांच परीक्षण में उनकी बात को आधार माना गया।

जांच में क्या सामने आया

तीन वरिष्ठ इंजीनियरों की जांच में सामने आया कि ऐशबाग ब्रिज का एंगल 90 डिग्री नहीं बल्कि 119 डिग्री था। जगह की कमी के कारण अधिकतम संभव एंगल रखा गया था। लेकिन निर्माण के दौरान दोनों तरफ के स्लैब को सीधी लाइन में जोड़ने से सही कर्व नही बन पाया।

जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि निर्माण के दौरान अधिकारियों ने समय रहते तकनीकी निर्णय और बेहतर सुपरविजन किया होता तो डिजाइन में सुधार संभव था। इसके अलावा रेलवे क्षेत्र में सर्कुलर पिलर की जगह वाल टाइप पिलर बनाए जाने को भी गंभीर त्रुटि माना गया।

किस अधिकारी पर क्या आरोप

शबाना रज्जाक और शानुल सक्सेना पर रेलवे की सहमति के बिना ड्राइंग अनुमोदित करने का आरोप था।

संजय खांडे पर गलत डिजाइन अनुमोदन का आरोप लगा।

उमाशंकर मिश्रा और रवि शुक्ला पर बिना रेलवे अनुमति निर्माण कार्य कराने का आरोप था।

जीपी वर्मा पर आरओबी निर्माण में त्रुटिपूर्ण कार्यवाही कराने का आरोप लगा।

रिटायर्ड ईई जावेद शकील और एमपी सिंह पर भी निर्माण और डिजाइन अनुमोदन में लापरवाही के आरोप लगाए गए थे।

4 से 5 महीने चल सकती है विभागीय जांच

अब विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे, जो दस्तावेजों, बयानों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच करेंगे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पूरी जांच प्रक्रिया में 4 से 5 महीने का समय लग सकता है।

आलोक त्रिपाठी
Written By

आलोक त्रिपाठी

खबरों की खोज जारी है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिलचस्पी। मध्य प्रदेश की खबरनवीसी का खास शौक।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें