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100% टैरिफ की धमकी से मचा हड़कंप : रूस को घेरने निकला अमेरिका, निशाने पर आया भारत!

admin

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Sep 15, 2026
04:59 AM
रूस को घेरने निकला अमेरिका, निशाने पर आया भारत!

नई दिल्ली। रूस को घेरने की अमेरिकी कोशिश अब भारत तक पहुंचती दिख रही है। वॉशिंगटन में रूस पर नए प्रतिबंधों को लेकर ऐसा सियासी घमासान मचा है, जिसने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। अमेरिकी सांसदों ने प्रतिबंध बिल में ऐसे संशोधन सामने रखे हैं, जिनमें रूस के बड़े कारोबारी साझेदारों पर सीधे निशाना साधने की तैयारी है। इस सूची में भारत का नाम भी शामिल करने की मांग उठी है। इतना ही नहीं, रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव बढ़ा दिया है। अब सबकी नजर अमेरिकी संसद पर टिकी है।

मामला अब अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स तक पहुंच गया है। इससे आने वाले दिनों में बिल को लेकर अमेरिकी राजनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।

सीनेट में भारी बहुमत से पास हो चुका है बिल

‘लिंडसे ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ के नाम से चर्चा में आया यह बिल पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में भारी बहुमत से पारित हुआ था। इसे 86 के मुकाबले 11 वोटों से मंजूरी मिली। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य रूस के नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध लगाना है। बिल में रूस के तेल कारोबार में मदद करने वाले जहाजों के बेड़े पर भी कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। अमेरिका का आरोप है कि रूस कच्चे तेल से होने वाली आय का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में कर रहा है।

भारत समेत 10 देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव

बिल के मौजूदा प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। हालांकि सीनेट से पारित संस्करण में किसी देश का नाम सीधे नहीं दिया गया था। अब डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी हॉयर ने संशोधन पेश कर चीन, भारत, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक जैसे देशों को सीधे बिल में शामिल करने की मांग की है।

टैरिफ प्रावधान हटाने की भी कोशिश

दूसरी ओर, डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने राष्ट्रपति को सेकेंडरी टैरिफ लगाने की शक्ति देने वाले बिल के सेक्शन 113 को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव दिया है। उनके प्रस्ताव को तीन अन्य सांसदों का समर्थन भी मिला है। अब निगाहें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर हैं, जहां इन संशोधनों पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। भारत का नाम सीधे शामिल किए जाने की मांग ने इस पूरे मामले को नई संवेदनशीलता दे दी है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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