रविवार, 27 सितंबर 202611:30:26 PM
Download App
Home/छत्तीसगढ़

27 सितंबर से शुरू पितृ पक्ष : बेमेतरा में पितृ पक्ष की शुरुआत, श्राद्ध-तर्पण को लेकर बाजार में बढ़ी हलचल; गयाजी पिंडदान के बाद भी करना चाहिए श्राद्ध?

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Sep 26, 2026
06:28 AM
बेमेतरा में पितृ पक्ष की शुरुआत, श्राद्ध-तर्पण को लेकर बाजार में बढ़ी हलचल; गयाजी पिंडदान के बाद भी करना चाहिए श्राद्ध?

बेमेतरा। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। बेमेतरा में भी पितृ पक्ष के आगमन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। इस दौरान लोग अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करेंगे।

27 सितंबर से शुरू होगा पितृ पक्ष

इस वर्ष बेमेतरा में पितृ पक्ष की शुरुआत 27 सितंबर से बताई जा रही है। वहीं, जिन लोगों के यहां पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध किया जाता है, उनके लिए श्राद्ध पक्ष शनिवार से ही प्रारंभ माना जाएगा। पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करते हैं। जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म किया जाता है।

गयाजी में पिंडदान के बाद घर पर श्राद्ध करना चाहिए?

पितृ पक्ष के दौरान अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि यदि गयाजी जाकर पिंडदान कर दिया गया है, तो क्या इसके बाद घर पर श्राद्ध और तर्पण करना जरूरी है?इस संबंध में बेमेतरा के राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी संत गणेश्वर शास्त्री जी महाराज का कहना है कि गयाजी में पिंडदान करने के बाद भी घर लौटकर नियमित रूप से श्राद्ध और तर्पण किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, पितृ पक्ष में अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार पितरों के निमित्त श्राद्ध कर्म, तर्पण और दान आदि करने की धार्मिक परंपरा है।

बाजार में बढ़ी पितृ पक्ष की तैयारियां

पितृ पक्ष के आगमन के साथ ही बेमेतरा के बाजारों में भी हलचल बढ़ गई है। श्राद्ध और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली पूजन सामग्री की खरीदारी के लिए लोग बाजार पहुंच रहे हैं। बाजार में कुश, जौ, काला तिल, उड़द दाल, जनेऊ सहित श्राद्ध कर्म में उपयोग होने वाली अन्य सामग्री आसानी से उपलब्ध है। श्रद्धालु अपनी आवश्यकता और परंपरा के अनुसार इन सामग्रियों की खरीदारी कर रहे हैं।

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण का महत्व

धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने दिवंगत परिजनों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे कर्म करते हैं। पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपने पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार कर्मकांड करते हैं। वहीं, मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होने की स्थिति में सर्वपितृ अमावस्या को श्राद्ध करने की परंपरा है।

नीलम अहिरवार
Written By

नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें