शुक्रवार, 14 अगस्त 202609:39:19 PM
Download App
Home/देश

युवाओं को गुमराह करने की कोशिश हुई : ‘कॉकरोच’ बयान पर CJI की सफाई, बोले- मेरी बात का गलत अर्थ निकाला गया

admin

admin

Aug 14, 2026
01:33 PM
‘कॉकरोच’ बयान पर CJI की सफाई, बोले- मेरी बात का गलत अर्थ निकाला गया

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने चर्चित ‘कॉकरोच’ बयान पर एक बार फिर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया और ऐसी बात का अर्थ निकाला गया, जो उन्होंने कही ही नहीं थी। मुख्य न्यायाधीश ने इसे देश के युवाओं को गुमराह करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश बताया। उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर अदालती कार्यवाही के अधूरे अंश प्रसारित किए जाने पर भी गंभीर चिंता जताई।

टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया

एक साक्षात्कार में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आजकल न्यायालय की कार्यवाही के छोटे-छोटे वीडियो अंश सामाजिक माध्यमों पर इस तरह प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे वास्तविक संदर्भ सामने नहीं आ पाता। उन्होंने कहा कि उनके साथ जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। उनकी टिप्पणी का अनुचित इस्तेमाल किया गया और ऐसी बात को उनके नाम से जोड़ा गया, जो उन्होंने कही ही नहीं थी।

15 मई की सुनवाई से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, 15 मई 2026 को उच्चतम न्यायालय में एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कथित फर्जी डिग्री रखने वाले कुछ लोगों की तुलना ‘कॉकरोच’ से की थी। बताया गया कि उन्होंने ऐसे लोगों के बारे में टिप्पणी की थी, जो सामाजिक माध्यमों या सूचना के अधिकार के कार्यकर्ता बनकर व्यवस्था को निशाना बनाने लगते हैं। इसके बाद उनकी टिप्पणी को लेकर युवाओं के बीच तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से हुआ विरोध

विवादित टिप्पणी के बाद व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से सामने आया। इसी संगठन से जुड़े लोगों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन किया। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए।

मीडिया से जिम्मेदारी निभाने की अपील

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालय की कार्यवाही की खबरों को लेकर मीडिया से जिम्मेदारी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों के साथ उसके दायित्व भी जुड़े हैं। सामाजिक माध्यम, समाचार माध्यम या किसी अन्य मंच से जुड़े लोगों को सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

कार्यवाही के अंशों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक

मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालय की कार्यवाही की ध्वनि और दृश्य रिकॉर्डिंग के अनधिकृत प्रसारण पर रोक संबंधी हालिया आदेश का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में पारदर्शिता जरूरी है और इसी उद्देश्य से उच्चतम न्यायालय ने कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया है। हालांकि, इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही की पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन उसके छोटे अंशों का व्यक्तिगत या व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल स्वीकार्य नहीं है।

admin
Written By

admin

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें