छतरपुर में मौत का जाल बनीं बंद पत्थर खदानें, 200 फीट गहरे गड्ढों में भरा पानी; बच्चों की सुरक्षा पर सवाल

छतरपुर, मध्य प्रदेश। छतरपुर जिले की क्रेशर मंडी में बंद पड़ी पत्थर खदानें अब लोगों की जान के लिए खतरा बनती जा रही हैं। सालों से खुली पड़ी इन खदानों में बारिश का पानी भर गया है, जिससे हादसों का जोखिम और बढ़ गया है। आरोप है कि कई खदानों के आसपास न तार फेंसिंग है, न बाउंड्रीवॉल और न ही बैरिकेडिंग। चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा के दूसरे इंतजाम भी नदारद हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर लोगों की जान की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
200 फीट गहरी खदानें, सुरक्षा के इंतजाम नदारद
छतरपुर जिले में कई ऐसी पत्थर खदानें हैं, जिनका संचालन बंद हो चुका है, लेकिन उन्हें सुरक्षित करने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। बताया जा रहा है कि कुछ खदानें करीब 200 फीट तक गहरी हैं। बारिश के बाद इनमें पानी भर जाने से गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है।
स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि खदानों को खुला छोड़ दिए जाने के कारण कई बच्चे हादसों का शिकार होकर अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि, इन घटनाओं की संख्या और विवरण की आधिकारिक पुष्टि किया जाना जरूरी है।

मुख्य सड़क के किनारे खुली खदानें, हर वक्त हादसे का खतरा
कुछ बंद खदानें मुख्य सड़क के आसपास स्थित हैं, जहां से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, राहगीर और वाहन चालक गुजरते हैं। आसपास के खेतों में काम करने वाले किसान भी अपने परिवार और बच्चों के साथ आते-जाते हैं।
ऐसे में यदि कोई बच्चा खेलते हुए या नहाने के लिए पानी से भरी खदान में उतर जाए, तो गहराई और सुरक्षा के अभाव में गंभीर हादसा हो सकता है। पानी के कारण खदान के किनारे और ढलान का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।
प्रकाश बम्हौरी क्षेत्र में भी गंभीर खतरा
प्रकाश बम्हौरी क्षेत्र में पत्थर की खदानें अधिक होने की बात सामने आई है। यहां किसान अपने परिवार के साथ खेतों तक आते-जाते हैं। ग्रामीणों की चिंता है कि खुली खदानों के आसपास सुरक्षा घेरा नहीं होने से बच्चों और पशुओं के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।
आरोप है कि कई खदानों के संचालकों ने संचालन बंद होने के बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से तार फेंसिंग, बाउंड्रीवॉल, बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना जरूरी होगा।
खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल
इस मामले में खनिज विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि खदानों से जुड़े खतरों की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं।
अब जरूरत है कि प्रशासन और खनिज विभाग जिले की बंद पड़ी खदानों का सर्वे कराएं। खदानों की गहराई, पानी की स्थिति और आसपास की आबादी को देखते हुए खतरनाक स्थलों पर तत्काल बैरिकेडिंग, मजबूत सुरक्षा घेरा और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। संबंधित खदान संचालकों की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जानी चाहिए।
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
