एकात्म धाम: : सीएम मोहन ने रखी भव्य पंचायती मंदिर की नींव, 45 पवित्र पत्थरों की पूजा के साथ शुरू हुआ निर्माण, 121 कलशों से सजेगा टेंपल

खंडवा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को खंडवा स्थित एकात्मा धाम में भव्य पंचायती मंदिर की आधारशिला रखी। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने पत्नी सीमा यादव के साथ 45 पवित्र पत्थरों की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर संन्यास परंपरा के प्रतिनिधि, षड्दर्शन संत मंडल के संत और बड़ी संख्या में गणमान्यजन मौजूद रहे।
वैदिक परंपरा के अनुसार हुआ भूमिपूजन
आधारशिला कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम के प्रधान तथा कर्नाटक के दक्षिणाम्नाय शारदा पीठम और श्री श्री गुरुकुल से जुड़े आचार्यों ने वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा संपन्न कराई। मंदिर को आदि शंकराचार्य के आध्यात्मिक दर्शन और भारतीय संस्कृति की समृद्ध स्थापत्य परंपरा के प्रतीक के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, पंचायती पूजा आदि शंकराचार्य के उस विचार को दर्शाती है, जिसमें अलग-अलग पूजा परंपराओं के बीच समन्वय और एकता का संदेश दिया गया। इस व्यवस्था में शिव, विष्णु, सूर्य, गणेश और शक्ति को एक ही सर्वोच्च वास्तविकता के विभिन्न स्वरूपों के रूप में माना जाता है।
नागर शैली में बनेगा भव्य मंदिर
मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया जाएगा। इसके लिए करीब 80 हजार घन फुट गुलाबी बलुआ पत्थर का इस्तेमाल होगा। मुख्य गर्भगृह में भगवान शिव विराजमान होंगे, जबकि चारों कोनों पर भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और देवी शक्ति के लिए सहायक गर्भगृह बनाए जाएंगे।

मुख्य गर्भगृह पर सोमतिलक शैली का शिखर होगा। गर्भगृह सर्वतोभद्र शैली में तैयार किया जाएगा, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। मंदिर में 100 कलात्मक स्तंभ, आठ सम्वर्ण संरचनाएं और आकर्षक तोरणद्वार बनाए जाएंगे।
121 कलशों से सजेगा मंदिर
मंदिर का मुख्य मंडप भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। यहां 26 फुट व्यास का गुंबद बनाया जाएगा। पूरी संरचना 16 फुट ऊंचे जगती स्तंभ पर खड़ी होगी और इसे 121 कलशों से सजाया जाएगा। बाहरी हिस्से में भद्र, कर्ण, प्रतिरथ और देवकोष्ठ जैसे पारंपरिक स्थापत्य तत्वों के साथ सुंदर सजावटी पैनल भी उकेरे जाएंगे।

एकात्मा धाम का यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भारतीय वास्तुकला, मूर्तिकला और सनातन परंपराओं के समन्वय को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थल भी बनेगा। मंदिर के माध्यम से आदि शंकराचार्य के एकात्म और समन्वय के संदेश को आधुनिक पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
