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हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदला भोजशाला का माहौल : सुबह-सुबह मां वाग्देवी का दर्शन करने पहुंचे भक्त, यज्ञ कुंड को किया प्रणाम

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May 16, 2026
06:14 AM
सुबह-सुबह मां वाग्देवी का दर्शन करने पहुंचे भक्त, यज्ञ कुंड को किया प्रणाम

धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शनिवार को पूरे इलाके का माहौल बदला-बदला नजर आया। फैसले के बाद सुबह से ही भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। पूरे परिसर में शांति बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखी।

मां वाग्देवी को अर्पित किए पुष्प, यज्ञ कुंड पर किया प्रणाम

फैसले के बाद भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे समेत कई हिंदू संगठन के पदाधिकारी और श्रद्धालु भोजशाला पहुंचे। यहां उन्होंने मां वाग्देवी के स्थान पर पुष्प अर्पित किए और दंडवत प्रणाम कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद श्रद्धालु यज्ञ कुंड के पास पहुंचे और वहां भी श्रद्धा भाव से प्रणाम किया।

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पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई श्रद्धालुओं ने इसे वर्षों के संघर्ष और आस्था की जीत बताया। लोगों ने मंदिर परिसर में भजन-पूजन कर फैसले का स्वागत किया।

“भोजशाला मंदिर था, है और रहेगा”: गोपाल शर्मा

इस मौके पर गोपाल शर्मा ने कहा कि यह अभी पूरी जीत नहीं है, लेकिन यह फैसला ऐतिहासिक जरूर है। उन्होंने कहा कि भोजशाला का कण-कण इस बात का प्रमाण देता है कि यह एक मंदिर है। उन्होंने कहा, “अगर मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाना चाहता है तो जाए, लेकिन सत्य यही है कि भोजशाला मंदिर था, मंदिर है और मंदिर ही रहेगा।”

हिंदू संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले को धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यहां धार्मिक गतिविधियां और व्यवस्थित रूप से संचालित की जाएंगी।

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मुस्लिम पक्ष करेगा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। मुस्लिम पक्ष से जुड़ी मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी ने स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) दायर करने का फैसला लिया है। वहीं हिंदू पक्ष की ओर से जितेंद्र सिंह विशेन ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर दी है, ताकि बिना उनका पक्ष सुने कोई आदेश पारित न हो सके।

अब पूरे देश की नजर इस संवेदनशील मामले पर टिकी हुई है, क्योंकि आने वाले दिनों में यह विवाद देश की सर्वोच्च अदालत में नई कानूनी बहस को जन्म दे सकता है।

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