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सुप्रीम कोर्ट से प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत : जुलाई में दर्ज FIR खत्मय जांच और कार्रवाई पर भी रोक, अनुच्छेद 142 की विशेष शक्ति का किया इस्तेमाल

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 01, 2026
11:21 AM
जुलाई में दर्ज FIR खत्मय जांच और कार्रवाई पर भी रोक,  अनुच्छेद 142 की विशेष शक्ति का किया इस्तेमाल

नई दिल्ली। काकरोच जनता पार्टी द्वारा जुलाई में किए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने मंगवाल को 20 से 25 जुलाई के बीच हुई घटनाओं से संबंधित 5 राज्यों में दर्ज दर्ज एफआईआर को समाप्त करने का आदेश दे दिया है। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 में मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पांच राज्यों की ओर से दायर प्राथमिकी रद्द करने की मांग को मंजूरी दे दी। साथ ही देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में समान घटनाओं को लेकर दर्ज मामलों में आगे की कार्रवाई और जांच पर भी रोक लगा दी गई है।

20 से 26 जुलाई तक नई प्राथमिकी पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी निर्देश दिया कि 20 से 26 जुलाई के दौरान हुई घटनाओं के संबंध में नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाए। हालांकि, अदालत ने कुछ विशेष मामलों में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को सीमित छूट दी है।

2,873 लोगों पर दर्ज हो सकेगी नई प्राथमिकी

अदालत ने आवेदन में नामित 2,873 लोगों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति दी है। यह कार्रवाई तभी संभव होगी, जब जांच में उनके दो अपराधों में शामिल होने की बात सामने आए। सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही साफ किया कि इन लोगों के खिलाफ दर्ज होने वाली नई प्राथमिकी उनके कानूनी अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी। संबंधित व्यक्ति कानून के तहत उपलब्ध राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकेंगे।

पूरे देश के लिए बनेगा मुआवजे का ढांचा

प्रदर्शन से जुड़े मामलों के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे की व्यवस्था को लेकर भी अहम निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ चर्चा कर देशभर में लागू किए जा सकने वाले मुआवजे का एक ढांचा तैयार करना होगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसे नियमित मुआवजा व्यवस्था के रूप में अपनाने के लिए कहा गया है।

नीट से जुड़े आत्महत्या मामलों पर भी निर्देश

अदालत ने नीट 2026 से संबंधित आत्महत्या के मामलों में भी केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है। फैसले के बाद सीजेपी के प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट का आभार जताते हुए इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि अदालत का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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