शनिवार, 31 अक्टूबर 202612:26:37 PM
Download App
Home/धर्म

दीपावली के पांच अध्याय : पांच दिन, पांच पर्व...दीपोत्सव का महाउत्सव! जानिए दीपों की जगमगाहट, परंपराओं की विरासत!

नीलम अहिरवार

नीलम अहिरवार

Oct 31, 2026
10:58 AM
पांच दिन, पांच पर्व...दीपोत्सव का महाउत्सव! जानिए दीपों की जगमगाहट, परंपराओं की विरासत!

धर्म। भारत में त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और परंपराओं की पहचान हैं... ऐसा ही एक पर्व है दीपावली... जिसका इंतजार हर किसी को रहता है... रोशनी, खुशियां, मिठाइयां, पूजा-पाठ और अपनों के साथ जश्न... दीपावली अपने साथ बहुत कुछ लेकर आती है... लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपावली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला उत्सव है... धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक चलने वाले इन पांच पर्वों का अपना अलग धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है... कहीं धन-समृद्धि की कामना होती है, तो कहीं बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश मिलता है... आइए जानते हैं दीपावली के पांच दिनों की खास परंपराएं और उनका महत्व...

दीपावली का महत्व

दीपावली... यानी दीपों की अवली... यानी दीपों की पंक्ति... कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है... धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 14 वर्ष का वनवास पूरा करने और रावण का वध करने के बाद जब भगवान श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाए... तभी से दीप जलाकर खुशियां मनाने की परंपरा जुड़ी है... वहीं कुछ क्षेत्रों में भगवान श्रीकृष्ण के नरकासुर वध को भी दीपोत्सव से जोड़कर देखा जाता है... इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की जाती है…

दीपावली का महत्व

  • दीपों की पंक्ति है दीपावली का अर्थ

  • अंधकार पर प्रकाश की विजय

  • सत्य, ज्ञान और सकारात्मकता का संदेश

धनतेरस: सुख-समृद्धि की कामना

दीपावली उत्सव की शुरुआत होती है धनतेरस से... जिसे धनत्रयोदशी भी कहा जाता है... मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे... इसलिए इस दिन उनकी पूजा की जाती है... धनतेरस पर सोना-चांदी, बर्तन और नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है... वहीं माता लक्ष्मी और कुबेर की आराधना कर घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य की कामना की जाती है…

नरक चतुर्दशी: बुराई पर अच्छाई की जीत

धनतेरस के बाद आती है नरक चतुर्दशी... जिसे रूप चौदस और छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है... पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन राक्षस नरकासुर का वध कर 16 हजार राजकुमारियों को उसके बंधन से मुक्त कराया था... इस दिन सूर्योदय से पहले अभ्यंग स्नान करने और यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है... मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है...

दीपावली: रोशनी और लक्ष्मी पूजन का पर्व

पांच दिवसीय दीपोत्सव का सबसे प्रमुख दिन है दीपावली.कार्तिक अमावस्या की रात घरों, मंदिरों और प्रतिष्ठानों को दीपों से सजाया जाता है. माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर धन, वैभव और सुख-शांति की कामना की जाती है... धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी कार्तिक अमावस्या के दिन प्रकट हुई थीं... यही वजह है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है... व्यापारिक प्रतिष्ठानों में नई बही-खाते की शुरुआत भी की जाती है

गोवर्धन पूजा: प्रकृति और अन्न का सम्मान

दीपावली के अगले दिन मनाया जाता है गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व... पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा के स्थान पर प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया था... जब इंद्र ने भारी वर्षा की, तो भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की... तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा चली आ रही है... इस दिन भगवान को तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है, जिसे अन्नकूट कहा जाता है


भाई दूज: भाई-बहन के प्रेम का पर्व

पांच दिवसीय दीपोत्सव का आखिरी दिन होता है भाई दूज... यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है... पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे थे... बहन ने उनका तिलक कर स्वागत किया और भोजन कराया... प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान दिया... तभी से भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं…


अलग-अलग धर्मों में दीपावली का महत्व

दीपावली का महत्व सिर्फ हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है... जैन धर्म में यह दिन भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है... वहीं सिख धर्म में इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है... इस दिन गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर के किले से रिहा होकर अमृतसर पहुंचे थे. इस तरह दीपावली का पर्व अलग-अलग धर्मों की आस्था और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है…

अलग-अलग धर्मों में दीपावली

  • जैन धर्म – भगवान महावीर का निर्वाण

  • सिख धर्म – बंदी छोड़ दिवस

  • हिंदू धर्म – भगवान राम की अयोध्या वापसी


दीपावली का संदेश

दीपावली सिर्फ दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का पर्व है.यह त्योहार हमें प्रेम, सद्भाव, एकता और भाईचारे का संदेश देता है... साथ ही बुराई छोड़कर अच्छाई अपनाने और जरूरतमंदों के जीवन में भी खुशियों का दीप जलाने की प्रेरणा देता है.तो ये हैं दीपावली के पांच दिन और उनसे जुड़ी हमारी आस्था और परंपराएं... हर दिन का अपना महत्व है और हर पर्व अपने साथ एक खास संदेश लेकर आता है.आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.

नीलम अहिरवार
Written By

नीलम अहिरवार

17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।

आपको यह खबर कैसी लगी? शेयर करें

अपने दोस्तों और परिवार के साथ साझा करें