देश के साथ होंगे चुनाव! : वन नेशन, वन इलेक्शन पर पीपी चौधरी का बड़ा बयान, दस राज्यों का दौरा कर जुटाए सुझाव

नई दिल्ली। नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी तेज हो गई है। लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की वन नेशन, वन इलेक्शन योजना अब संसदीय मंथन के अहम दौर में पहुंच चुकी है। इस व्यवस्था को लागू करने की दिशा में संसदीय समिति विभिन्न संवैधानिक, राजनीतिक और व्यावहारिक पहलुओं पर मंथन कर रही है।
समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि इस विधेयक का मकसद लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक कराना हैं। इस दौरान उन्होंने यह भी दावा किया की एक साथ चुनाव की सोच संविधान की मूल भावना में भी शामिल थी। बता दें कि लोकसभा ने विधेयक को 41 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास विचार के लिए भेजा है।
1952 से 1967 तक एक साथ हुए थे चुनाव
पीपी चौधरी ने बताया कि वर्ष 1952 से 1967 के बीच देश में लोकसभा और विधानसभा के चार आम चुनाव एक साथ हुए थे। उस दौरान चुनावी समय-सारणी को एक समान बनाए रखने के लिए आठ से नौ राज्यों की विधानसभाओं को कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग किया गया था। उनके अनुसार, यह व्यवस्था दर्शाती है कि संविधान निर्माण के समय भी एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा पर विचार मौजूद था।
25 बैठकें और 10 राज्यों का दौरा
समिति अध्यक्ष ने बताया कि अब तक दिल्ली में 25 बैठकें हो चुकी हैं। इसके अलावा करीब 10 राज्यों का दौरा कर राजनीतिक दलों, उद्योग जगत, नागरिक संगठनों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लिए गए हैं। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्षों और राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ भी विचार-विमर्श किया गया है।
क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व पर भी मंथन
एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रभाव और देश के संघीय ढांचे को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आशंका जताई जाती है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने से राष्ट्रीय दलों का प्रभाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय दलों के लिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना मुश्किल हो सकता है।
चौधरी के मुताबिक, विशेषज्ञों ने 1967 से 2024 तक के चुनावी इतिहास का विश्लेषण करते हुए समिति के सामने अपने विचार रखे हैं। इसमें अलग-अलग चुनावी दौर, गठबंधन सरकारों और 2014, 2019 तथा 2024 के लोकसभा चुनावों का भी अध्ययन शामिल है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
