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वीटो अधिकार नहीं, जिम्मेदारी का विषय : संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार की उठाई मांग

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Oct 27, 2026
05:06 AM
संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार की उठाई मांग

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार और वीटो अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने वीटो के अनुचित इस्तेमाल और निर्णय प्रक्रिया में बाधा डालने वाली व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वीटो केवल विशेषाधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का विषय है। भारत ने जोर दिया कि सुरक्षा परिषद को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने के लिए उसके विस्तार के साथ नए स्थायी सदस्यों को शामिल करना जरूरी है।

सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पांच स्थायी सदस्यों (पी5) के वीटो अधिकारों पर चर्चा के दौरान हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। अंतर-सरकारी वार्ता यानी इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स (आईजीएन) में ‘डी फैक्टो वीटो’ या अप्रत्यक्ष वीटो का इस्तेमाल बातचीत को आगे बढ़ने से रोक रहा है।

‘आम सहमति’ की आड़ में सुधार प्रक्रिया बाधित

हरीश के अनुसार, आईजीएन में आम सहमति की दलील का इस्तेमाल अप्रत्यक्ष वीटो की तरह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2008 के महासभा प्रस्ताव में सुधार प्रक्रिया का आधार ‘अधिकतम राजनीतिक स्वीकृति’ बताया गया है, न कि सर्वसम्मति। इसके बावजूद प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के कारण बातचीत के लिए मसौदा अपनाने में बाधाएं आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि वार्ता के 17 दौर पूरे होने के बाद भी ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। भारत ने मांग की कि स्पष्ट समय-सीमा और लक्ष्यों के साथ मसौदे पर आधारित बातचीत जल्द शुरू की जाए, ताकि सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधारों का रास्ता खुल सके।

गैर-स्थायी सदस्य भी रोक सकते हैं फैसले

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि अप्रत्यक्ष वीटो केवल सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों तक सीमित नहीं है। आम सहमति की अलिखित परंपरा के कारण परिषद का कोई भी सदस्य अध्यक्षीय बयान, प्रेस बयान और प्रतिबंध समितियों के फैसलों को रोक सकता है। कई बार इसके लिए औपचारिक वीटो का इस्तेमाल भी नहीं करना पड़ता।

उन्होंने इस व्यवस्था को निर्णय प्रक्रिया में बाधा बताते हुए कहा कि वीटो की समस्या का समाधान केवल उसके इस्तेमाल को नियंत्रित करने से नहीं होगा। परिषद की कार्यप्रणाली और प्रतिनिधित्व, दोनों में बदलाव जरूरी हैं।

आतंकवादियों पर प्रतिबंध के प्रयासों का भी उठाया मुद्दा

हरीश ने प्रतिबंध समितियों में आम सहमति की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों में आई बाधाओं की ओर भी ध्यान दिलाया। भारत ने पहले भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में रुकावटों पर सवाल उठाए हैं।

नए स्थायी सदस्यों को वीटो देने की पैरवी

भारत ने सुरक्षा परिषद के विस्तार और नए स्थायी सदस्यों को शामिल करने की मांग दोहराई। हरीश ने कहा कि परिषद की मौजूदा संरचना करीब आठ दशक पहले के वैश्विक हालात को दर्शाती है, जबकि आज की दुनिया की वास्तविकताएं बदल चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का सिद्धांत-आधारित रुख है कि जब तक वीटो का प्रावधान बना रहता है, तब तक सुधार के तहत शामिल होने वाले नए स्थायी सदस्यों को भी यह अधिकार मिलना चाहिए। भारत के मुताबिक, व्यापक प्रतिनिधित्व और समान अधिकारों वाली सुरक्षा परिषद ही वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

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