बदला आ रहा है : लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान की खुली धमकी, कहा- भागने की नहीं मिलेगी जगह

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब सीधे टकराव की दहलीज पर पहुंचता दिख रहा है। लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के बाद तेहरान का गुस्सा भड़क उठा है और ईरान ने खुलकर बदला लेने की चेतावनी दे दी है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने अमेरिका को चेताते हुए कहा कि उसकी ताकत को दोबारा परखा गया तो भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उनका ‘भाग सको तो भाग लो’ वाला बयान खाड़ी में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच बेहद आक्रामक संदेश माना जा रहा है। अब दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।
अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार
अमेरिका ने रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित ईरान के लारक द्वीप पर हमला किया था। अमेरिकी केंद्रीय कमान के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की सेनाएं समुद्री मार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही थीं। इसी आशंका के चलते अमेरिकी सेना ने द्वीप पर मौजूद ईरानी रॉकेट प्रक्षेपकों को निशाना बनाया।
अमेरिका का कहना है कि उसने पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी मार्ग से समुद्री सुरंगें हटाने का अभियान पूरा किया था। ऐसे में दोबारा सुरंगें बिछाने की तैयारी को समुद्री यातायात के लिए गंभीर खतरा माना गया।
जॉर्डन और कतर में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से जॉर्डन और कतर में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरान ने मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से जॉर्डन की ओर बढ़ रही मिसाइलों को अमेरिकी सेनाओं ने रोक दिया।
जॉर्डन की सेना ने बताया कि उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को रोक दिया गया। वहीं, कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डे के पास विस्फोट की खबर भी सामने आई है, हालांकि इसकी पूरी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा युद्धक्षेत्र
अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे संवेदनशील केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही इसी समुद्री मार्ग से होती है। संघर्ष बढ़ने के साथ यहां जहाजों की आवाजाही पहले ही प्रभावित हुई है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। अब ईरान की खुली जवाबी धमकी ने आशंका बढ़ा दी है कि यदि सैन्य कार्रवाई आगे बढ़ी तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
