जनकपुर अस्पताल की बदहाल तस्वीर : प्रसूति वार्ड में टपकती छत, करंट का डर , मरीजों की सुरक्षा पर संकट

तनवीर आलम महेंद्रगढ़ : भरतपुर विकासखंड के दर्जनों गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र माने जाने वाला जनकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों बदहाली और अव्यवस्थाओं का प्रतीक बन गया है। कागजों में 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल की वास्तविक स्थिति चिंताजनक है। जर्जर भवन, टपकती छत, दीवारों में सीपेज और डॉक्टरों की भारी कमी के बीच मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल
जानकारी के मुताबिक अस्पताल में वर्तमान में करीब 70 से 75 बेड ही संचालित हो पा रहे हैं। सबसे ज्यादा खराब हालात महिला प्रसूति वार्ड के हैं, जहां छत से प्लास्टर गिरने और दीवारों में नमी के कारण करंट फैलने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में भर्ती गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल भवन लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। बारिश का मौसम करीब आने से मरीजों और अस्पताल स्टाफ की चिंता और बढ़ गई है।
निरीक्षण में खुली व्यवस्थाओं की पोल
जनपद पंचायत अध्यक्ष माया प्रताप सिंह ने अस्पताल का निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूरे ब्लॉक की स्वास्थ्य व्यवस्था केवल तीन डॉक्टरों के भरोसे चल रही है, जो बेहद गंभीर स्थिति है। निरीक्षण के दौरान प्रसूति वार्ड में एक कमरे में कई मरीज भर्ती मिले और भवन में जगह-जगह सीपेज दिखाई दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अस्पताल 100 बेड का है तो यहां 50 बेड जैसी सुविधाएं भी क्यों नजर नहीं आ रहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस मुद्दे को जिला स्तर से लेकर सामान्य सभा तक उठाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा।

प्रसूति वार्ड बना सबसे बड़ा खतरा
अस्पताल का लेबर रूम और महिला वार्ड सबसे ज्यादा जर्जर स्थिति में है। परिजनों का कहना है कि रात में कई बार छत से पानी टपकता है और बिजली के तारों के पास नमी होने से डर बना रहता है। नवजात बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। नगर पंचायत उपाध्यक्ष एवं विधायक प्रतिनिधि निलेश मिश्रा ने भी हालात को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी विभाग से चर्चा कर बारिश शुरू होने से पहले मरम्मत कराने की कोशिश की जा रही है।
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बीएमओ ने मानी समस्या
जनकपुर बीएमओ डॉ. राजीव कुमार रमन ने अस्पताल भवन की खराब स्थिति स्वीकार करते हुए कहा कि अस्पताल में फिलहाल लगभग 74 बेड संचालित हैं, लेकिन भवन काफी पुराना और बड़ा है। उन्होंने बताया कि लेबर रूम में प्लास्टर झड़ने और करंट आने की शिकायतों को लेकर कई बार सीएमएचओ कार्यालय को पत्र भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि भवन पीडब्ल्यूडी विभाग के अधीन होने के कारण बड़े स्तर की मरम्मत जिला प्रशासन और संबंधित विभाग की मंजूरी के बाद ही संभव हो सकेगी।
ग्रामीणों के लिए यही एक बड़ा सहारा
जनकपुर अस्पताल नगर क्षेत्र के साथ-साथ दूरदराज ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों के इलाज का मुख्य केंद्र है। सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या अंबिकापुर रेफर करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बारिश शुरू होने से पहले अस्पताल की मरम्मत हो पाएगी, डॉक्टरों की कमी दूर होगी और मरीजों को सुरक्षित इलाज मिल सकेगा या नहीं
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आलोक त्रिपाठी
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