स्कूलों में अब ‘बिना इजाजत एंट्री नहीं’ : स्कूल ठीक करो अभियान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, पत्रकार-यूट्यूबर्स की याचिका खारिज

नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश और राजस्थान में स्कूल ठीक करो अभियान को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सरकारी स्कूलों के बाहरी लोगों, पत्रकारों यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया यूजर्स के प्रवेश पर लगाए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को स्वीकार करने इनकार किया। कोर्ट के इस फैसले को अभियान को बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 32 में सुनवाई से किया इनकार
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है।
बता दें कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभागों ने हाल में सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश और बिना अनुमति फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, साक्षात्कार, ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा सीधे प्रसारण पर पाबंदी लगाई थी। याचिकाकर्ता ने इस पाबंदी को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस तरह के प्रतिबंध नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-ए के तहत मिले अधिकारों को प्रभावित करते हैं। याचिका में यह भी कहा गया कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए स्वतंत्र रूप से वहां की तस्वीर और वीडियो दर्ज करना जरूरी है।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बाद बढ़ा विवाद
स्कूलों में बाहरी लोगों की आवाजाही और वीडियो बनाने को लेकर विवाद उस समय तेज हुआ, जब ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान विभिन्न राज्यों के सरकारी विद्यालयों से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने लगे। अभियान के तहत स्कूलों में पहुंचकर वहां की कमियों को उजागर करने के प्रयास किए गए।
इन गतिविधियों के दौरान कुछ जगहों पर बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश और शिक्षकों से पूछताछ को लेकर भी विवाद सामने आया। लखनऊ के एक स्कूल में कुछ यूट्यूबर्स के कथित तौर पर बिना अनुमति पहुंचने और शिक्षिकाओं पर दबाव बनाने की घटना ने भी मामले को तूल दिया।
शौचालय से लेकर मध्याह्न भोजन तक मुद्दा
याचिकाकर्ता का तर्क था कि स्कूलों में स्वतंत्र निरीक्षण और दस्तावेजीकरण से बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इनमें शौचालय, पेयजल, मध्याह्न भोजन, भवन और अन्य आधारभूत सुविधाएं शामिल हैं। वहीं, राज्यों की ओर से बिना अनुमति प्रवेश और रिकॉर्डिंग पर रोक लगाने के पीछे स्कूलों में अनुशासन, बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की गरिमा जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण माना गया।
प्रफुल्ल तिवारी
एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।
