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‘पूरी धरती एक परिवार है’ : टोरंटो में मोहन भागवत ने दिया एकता और सेवा का संदेश, बताया हिन्दू की पहचान भी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Aug 31, 2026
05:57 AM
टोरंटो में मोहन भागवत ने दिया एकता और सेवा का संदेश, बताया हिन्दू की पहचान भी

टोरंटो। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि हिंदू पहचान को किसी एक भाषा, पूजा-पद्धति या जीवनशैली के दायरे में सीमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंदू विचारधारा की मूल भावना विविधताओं का सम्मान करने और उनके पीछे मौजूद एकता को पहचानने में है। ग्रेटर टोरंटो क्षेत्र में आयोजित एक सभा में उन्होंने कहा कि बाहरी रूप से भले ही लोगों में अनेक अंतर दिखाई दें, लेकिन ये अंतर मानवता को उसकी मूल भावना में अलग नहीं करते।

‘हिंदू विश्व बंधु’ सभा में 2,000 से अधिक हिंदुओं ने लिया हिस्सा

‘दुनिया को दोस्ती के साथ अपनाना’ थीम पर आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु’ सभा में 2,000 से अधिक हिंदुओं और समुदाय के शुभचिंतकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में कनाडा के विभिन्न हिस्सों से धार्मिक एवं सामुदायिक नेता, विद्वान, पेशेवर और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भागवत ने कहा कि हिंदू शब्द को किसी खास भाषा, पूजा-पद्धति या जीवनशैली से परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये सभी मानवीय विविधताएं हैं और हिंदू परंपरा इन विविधताओं को स्वीकार करने तथा उनका सम्मान करने की बात करती है।

विविधता में एकता’ से आगे की सोच

संघ प्रमुख ने भारत की सभ्यतागत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने हमेशा लोगों को दिखाई देने वाले अंतरों के पीछे छिपी साझा एकता को पहचानना सिखाया है। उनके अनुसार भारत की विशेषता केवल ‘विविधता में एकता’ नहीं, बल्कि ‘एकता की विविधताओं’ को समझने में भी है।

उन्होंने कहा कि भारत में सदियों से अलग-अलग जातियां, धर्म, भाषाएं, परंपराएं और जीवनशैलियां मौजूद रही हैं। इसके बावजूद देश की एकता कायम रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एकता के लिए विविधताओं को खत्म करना जरूरी नहीं है, बल्कि उन्हें स्वीकार करना और उनका सम्मान करना चाहिए।

भागवत ने कहा, “विविधता स्वाभाविक है। एकता ही वास्तविकता है।” उन्होंने बाहरी अंतर को बदलती हुई परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि मनुष्य इन अंतरों का अनुभव करता है, लेकिन मूल रूप से मानवता एक है।

‘पूरी धरती एक परिवार’ का संदेश

भागवत ने लोगों को दुनिया को ‘अपना’ और ‘दूसरों का’ में बांटने के बजाय पूरी धरती को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सब कुछ दिव्य है और इसलिए हर व्यक्ति तथा हर अस्तित्व का सम्मान और महत्व है।

उन्होंने सेवा भावना को भी इसी मानवीय एकता से जोड़ते हुए कहा कि जरूरतमंद की मदद करना केवल किसी एक समुदाय की जिम्मेदारी या विशेषता नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की स्वाभाविक भावना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भूखे व्यक्ति को देखकर उसके सामने आराम से खाना खा पाना सहज मानवीय व्यवहार नहीं है।

आचरण से मिसाल पेश करे हिंदू समाज

भागवत ने कहा कि इंसान के भीतर दूसरों से चीजें छीनने और जरूरतमंदों के साथ बांटनेकृदोनों तरह की प्रवृत्तियां मौजूद होती हैं। ऐसे में सही दिशा चुनने के लिए मूल्यों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने हिंदू समाज से अपने विचार दूसरों पर थोपने के बजाय उन्हें अपने आचरण से प्रदर्शित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का सबसे प्रभावी तरीका उदाहरण प्रस्तुत करना है। हिंदू समाज को अपने सिद्धांतों को व्यवहार में उतारकर दुनिया के सामने मिसाल पेश करनी चाहिए।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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