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आतंकवाद को नहीं बनने दिया जाएगा रणनीतिक हथियार : एससीओ के मंच से गरजे पीएम मोदी, डबल स्टैंडर्ड पर सुनाई खरी-खरी

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Sep 01, 2026
06:51 AM
एससीओ के मंच से गरजे पीएम मोदी, डबल स्टैंडर्ड पर सुनाई खरी-खरी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं। एससीओ की बैठक में उन्होंने जहां भारत की सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं को मजबूती से रखा। वहीं पीएम मोदी ने आतंकवाद के दोहरे मापदंडों पर जमकर खरी खोटी सुनाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवाद को किसी भी देश के लिए रणनीतिक हथियार नहीं बनने दिया जा सकता। इस दौरा पीएम ने मंच से आतंक के पूरे नेटवर्क को खत्म करने की जरूरत पर भी जोर दिया।

आतंकवाद पर मोदी का सख्त संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हमले के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसके वित्तपोषण, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों समेत पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर किसी तरह के दोहरे मानदंड की गुंजाइश नहीं हो सकती।

कनेक्टिविटी पर भारत की शर्त साफ

मोदी ने एससीओ देशों के बीच बेहतर संपर्क और व्यापार को बढ़ावा देने का समर्थन किया, लेकिन साथ ही संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को अनिवार्य बताया। उन्होंने सड़क, रेल और हवाई संपर्क के साथ सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को आसान बनाने, डिजिटल दस्तावेजों और प्रभावी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ाने की जरूरत बताई। भारत के लिए कनेक्टिविटी का मतलब केवल व्यापार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और लोगों को जोड़ना भी है।

ड्रग्स और सुरक्षा पर भी फोकस

प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को युवाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने संगठित अपराध, साइबर एवं सूचना सुरक्षा और ड्रग तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एससीओ के भीतर बने तंत्रों को ज्यादा प्रभावी और परिणामदायी बनाने पर जोर दिया।

युद्ध से ऊर्जा और सप्लाई चेन तक असर

मोदी ने कहा कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में किसी एक क्षेत्र का संघर्ष भी वैश्विक असर पैदा करता है। पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों के संकटों का प्रभाव ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत ने स्पष्ट किया कि संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान के बजाय बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।

पुतिन से मुलाकात में शांति पर जोर

एससीओ से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा के दौरान पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों से समुद्री व्यापार तथा भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर भी बात हुई। मोदी ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

युवाओं को अवसर देना भारत की प्राथमिकता

प्रधानमंत्री ने एससीओ सहयोग के तीसरे स्तंभ के रूप में ‘अवसर’ को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि संगठन की सफलता केवल सरकारी समझौतों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होनी चाहिए कि युवाओं के लिए कितने अवसर पैदा हुए, उद्यमियों को कितने नए बाजार मिले और किसानों व आम नागरिकों को तकनीक एवं सहयोग का कितना लाभ मिला।

एससीओ की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा यह सम्मेलन भारत की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास, कनेक्टिविटी और रणनीतिक स्वायत्तता को समान महत्व दिया जा रहा है। भारत 2017 से ैब्व् का पूर्ण सदस्य है और इस मंच पर मध्य एशिया तथा यूरेशिया के देशों के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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