स्कूल शिक्षा विभाग अलर्ट : बीजापुर में स्कूलों में धार्मिक मंत्रों के आदेश का विरोध, भाकपा ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

बीजापुर। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों में धार्मिक मंत्रों के उच्चारण और वंदनाओं को दैनिक गतिविधियों में शामिल किए जाने संबंधी आदेश का विरोध शुरू हो गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है।
जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून 2026 को एक आदेश जारी कर शासकीय विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में धार्मिक मंत्रों के उच्चारण एवं वंदनाओं को शामिल करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कमलेश झाड़ी और अन्य पदाधिकारी बीजापुर स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
भाकपा नेताओं का कहना है कि शासकीय विद्यालय सभी वर्गों, समुदायों और धर्मों के विद्यार्थियों के लिए समान रूप से शिक्षा का केंद्र हैं। ऐसे में किसी विशेष धार्मिक मंत्र या वंदना को विद्यालय की दैनिक गतिविधियों में अनिवार्य रूप से शामिल करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना और समानता के सिद्धांत के विपरीत है।
पार्टी ने ज्ञापन में मांग की है कि राज्य सरकार 12 जून 2026 को जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले। उनका कहना है कि विद्यालयों का वातावरण समावेशी, वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए, ताकि सभी धर्मों और समुदायों के विद्यार्थी बिना किसी भेदभाव के शिक्षा प्राप्त कर सकें।

भाकपा जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में किसी भी प्रकार के धार्मिक आग्रह को बढ़ावा देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस आदेश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रही है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग कर रही है।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस विरोध और मांग पर क्या रुख अपनाती है।

नीलम अहिरवार
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