श्मशान तक नहीं सड़क, विकास पर सवाल : सक्ती: कीचड़ और दलदल से होकर कंधों पर शव ले जाने को मजबूर हुए ग्रामीण, सड़क की बदहाली पर फूटा गुस्सा

सक्ती | निशीथ तिवारी
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से विकास के दावों पर सवाल खड़े करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत सोंठी में सड़क की बदहाल स्थिति के कारण ग्रामीणों को एक मृत महिला का शव अंतिम संस्कार के लिए करीब एक किलोमीटर तक अपने कंधों पर उठाकर कीचड़ और दलदल भरे रास्ते से ले जाना पड़ा। इस दौरान उन्हें रास्ते में बह रही बोराई नदी भी पार करनी पड़ी। घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और सरकार के प्रति भारी नाराजगी देखी गई।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत सोंठी निवासी कमलाबाई महंत का निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के लिए परिजन और ग्रामीण शव को लेकर मुक्तिधाम की ओर निकले, लेकिन रास्ते की स्थिति बेहद खराब थी। हाल ही में हुई बारिश के कारण सड़क पूरी तरह कीचड़ और पानी से भर गई थी। कई स्थानों पर दलदल इतना गहरा था कि वाहन तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
मजबूरी में ग्रामीणों ने शव को अपने कंधों पर उठाया और घुटनों तक भरे कीचड़ के बीच लगभग एक किलोमीटर तक पैदल चलकर मुक्तिधाम की ओर बढ़े। इस दौरान उन्हें पानी से भरी बोराई नदी भी पार करनी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद वे अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंच सके।
घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। उनका कहना है कि सरकार गांवों में सड़क, बुनियादी सुविधाओं और विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुक्तिधाम तक जाने वाले रास्ते की वर्षों से अनदेखी की जा रही है और कई बार शिकायत के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति केवल अंतिम संस्कार के समय ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आवाजाही में भी भारी परेशानी का कारण बनती है। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह बंद होने जैसी स्थिति में पहुंच जाता है।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस घटना के बाद संबंधित विभाग सड़क निर्माण और मुक्तिधाम तक पहुंच मार्ग को दुरुस्त करने के लिए जल्द कदम उठाएगा, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी पीड़ादायक और अपमानजनक स्थिति का सामना न करना पड़े।
नीलम अहिरवार
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