चिप की दुनिया में भारत की लंबी छलांग : 1.64 लाख करोड़ के निवेश से तैयार हो रहा सेमीकंडक्टर हब, 6 राज्यों में 12 प्रोजेक्ट को मंजूरी

नई दिल्ली। भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तेजी से आगे बढ़ा रहा है। देश की रणनीति अब केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइनिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, कच्चे माल, सप्लाई चेन और कुशल प्रतिभाओं को जोड़कर एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने पर केंद्रित है। सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के मुताबिक, इस दिशा में अब कई अहम कदम उठाए जा चुके हैं।
सेमीकॉन 1.0 के बाद अब 2.0 पर बड़ा दांव
भारत ने वर्ष 2021 में सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की थी। इसके पहले चरण यानी सेमीकॉन 1.0 के लिए सरकार ने 76 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इसमें चिप डिजाइन और निर्माण के साथ पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, कच्चे माल और प्रशिक्षित मानव संसाधन को भी शामिल किया गया।
इसके बाद जुलाई 2026 में सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी गई, जिसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका फोकस छह प्रमुख क्षेत्रों पर हैकृचिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर निर्माण की मशीनरी और सामग्री, फैब्रिकेशन प्लांट, एडवांस पैकेजिंग, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और कुशल प्रतिभाओं का विकास।
छह राज्यों में 12 परियोजनाओं को मंजूरी
सरकारी आंकड़ों को मानें तो अब तक छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश की प्रतिबद्धता है। परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले निर्माण तथा आधुनिक पैकेजिंग सुविधाएं शामिल हैं।
इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना इस मिशन की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे संकेत मिलता है कि भारत की सेमीकंडक्टर नीति अब केवल योजनाओं और घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर जमीन पर दिखाई देने लगा है।
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