नीमच की हर्बल मंडी : जहां पत्तियों और जड़ों की भी लगती है लाखों की बोली, सरकार दे रही किसानो को अनुदान

मध्यप्रदेश का नीमच अब सिर्फ मसालों और अफीम की खेती के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सबसे अनोखी हर्बल मंडी के लिए भी पहचान बना रहा है। यहां ऐसी मंडी संचालित हो रही है, जहां औषधीय फसलों का हर हिस्सा बिकता है — चाहे वह कांटा हो, फूल, पत्ती, बीज, छाल या जड़। यही वजह है कि यह मंडी अब किसानों के लिए कमाई का बड़ा केंद्र बन चुकी है।
कई राज्यों के किसान आ रहे
नीमच की इस हर्बल मंडी में किसानों को उनकी फसलों के 500 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिल रहे हैं। मंडी की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ से भी किसान अपनी औषधीय उपज लेकर यहां पहुंच रहे हैं।
सरकार का मिल रहा सहयोग
दरअसल, देश में होने वाली औषधीय फसलों का करीब 44 प्रतिशत उत्पादन अकेले मध्यप्रदेश में होता है। राज्य सरकार भी इस सेक्टर को बढ़ावा देने में जुटी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को औषधीय खेती के लिए 20 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान पारंपरिक खेती से हटकर मुनाफे वाली हर्बल खेती की ओर बढ़ें।
रोजगार के नए अवसर
प्रदेश में अश्वगंधा, सफेद मूसली, गिलोय, तुलसी और कोलियस जैसी औषधीय फसलों की बड़े पैमाने पर खेती हो रही है। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। नीमच की यह हर्बल मंडी अब किसानों के लिए उम्मीद, मुनाफे और नए कृषि मॉडल की मिसाल बनती जा रही है।
आलोक त्रिपाठी
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