दतिया मे चुनावी मशीनें तैयार : एक बार फिर मुकाबले की तैयारी, आयोग के पत्र के बाद बढ़ी हलचल

दतिया में उपचुनाव की तैयारी शुरू होते ही मध्यप्रदेश की राजनीति फिर गरमा गई है। कांग्रेस विधायक की सदस्यता खत्म होने के बाद अब यह सीट खाली हो चुकी है और चुनावी रण सजने लगा है। लेकिन इस बार मुकाबला सिर्फ एक सीट का नहीं, बल्कि कांग्रेस की साख और भाजपा की रणनीति का भी माना जा रहा है।
नरोत्तम मिश्रा के गढ़ मे कांग्रेस ने किया था कब्जा
दतिया लंबे समय तक भाजपा और खासकर नरोत्तम मिश्रा का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में पिछला चुनाव कांग्रेस के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं था। अब उपचुनाव में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह इस सीट को बचाकर साबित करे कि पिछली जीत कोई दुर्घटना नहीं थी।
बीजेपी की प्रतिष्ठा दावं पर
दूसरी तरफ भाजपा इसे “प्रतिष्ठा की लड़ाई” मानकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में यह संदेश साफ है कि दतिया में वापसी सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि राजनीतिक दबदबे की वापसी मानी जाएगी।
प्रशासन जुटा तैयारी में
इधर प्रशासन भी पूरी तैयारी में जुट गया है। ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की जांच से लेकर मतदान केंद्रों की तैयारी तक सब तेज हो गया है। फिलहाल इतना तय है कि दतिया का यह उपचुनाव छोटा चुनाव नहीं होगा। यहां कांग्रेस अपनी पकड़ बचाने उतरेगी और भाजपा अपना पुराना किला वापस लेने। बाकी फैसला वही करेगा, जो हर चुनाव में सबसे ज्यादा शांत रहता है—मतदाता।
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आलोक त्रिपाठी
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