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मोहन सरकार का नया फॉर्मूला : मंत्री पद बचाने के लिए देना होगा रिपोर्ट कार्ड,संगठन के सामने मंत्रियों की होगी सीधी समीक्षा

आलोक त्रिपाठी

आलोक त्रिपाठी

May 17, 2026
09:56 AM
मंत्री पद बचाने के लिए देना होगा रिपोर्ट कार्ड,संगठन के सामने मंत्रियों की होगी सीधी समीक्षा

मध्यप्रदेश की राजनीति में अब केवल पद नहीं, प्रदर्शन भी मायने रखेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव की कैबिनेट के मंत्रियों के लिए पहली बार ऐसा दौर शुरू हुआ है, जहां उन्हें अपने कामकाज का हिसाब सीधे संगठन और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के सामने देना होगा।

यह कोई सामान्य बैठक नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन की उस नई कार्यशैली का संकेत है, जिसमें काम दिखाओ या जवाब दो का संदेश साफ नजर आ रहा है। हर मंत्री को सिर्फ 15 मिनट का समय मिलेगा, लेकिन इन्हीं 15 मिनटों में उसका पूरा राजनीतिक रिपोर्ट कार्ड खुल जाएगा।

मंत्रियों के लिए क्यों बनी ‘अग्नि परीक्षा’?

राजनीतिक गलियारों में इस समीक्षा को “अग्नि परीक्षा” कहा जा रहा है। वजह साफ है—यह केवल योजनाओं की जानकारी देने का मंच नहीं, बल्कि यह तय करने की प्रक्रिया भी मानी जा रही है कि कौन मंत्री सरकार की अपेक्षाओं पर खरा उतरा और कौन पीछे रह गया।

मंत्रियों को बताना होगा कि उन्होंने अपने विभाग में क्या बदलाव किए, जनता तक योजनाएं कितनी पहुंचीं और सरकार की छवि मजबूत करने में उनकी भूमिका कितनी प्रभावी रही। यानी अब केवल बयानबाजी नहीं, जमीन पर दिखने वाला काम ही असली पैमाना बनेगा।

संगठन की मौजूदगी ने बढ़ाई गंभीरता

इस पूरी प्रक्रिया को और अहम इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसमें भाजपा संगठन के बड़े चेहरे भी मौजूद रहेंगे। राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिव प्रकाश , क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल , प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद मंत्रियों के साथ वन-टू-वन चर्चा करेंगे। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार और संगठन दोनों अब समन्वय के साथ कामकाज की निगरानी करना चाहते हैं।

क्या कैबिनेट विस्तार की तैयारी है?

सियासी हलकों में इस समीक्षा को आगामी कैबिनेट फेरबदल और विस्तार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन कमजोर पाया जाएगा, उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है। वहीं बेहतर काम करने वाले मंत्रियों को संगठन और सरकार में अधिक महत्व मिल सकता है।

बदलती राजनीति का नया मॉडल

दरअसल, यह पूरी कवायद बताती है कि मध्यप्रदेश में भाजपा अब चुनावी राजनीति से आगे “परफॉर्मेंस पॉलिटिक्स” के मॉडल पर जोर दे रही है। जनता के बीच सक्रियता, योजनाओं की मॉनिटरिंग और प्रशासनिक परिणाम अब मंत्री पद बचाने की सबसे बड़ी शर्त बनते दिख रहे हैं।आने वाले दिनों में यह समीक्षा केवल मंत्रियों की नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की राजनीति के नए दौर की भी परीक्षा साबित हो सकती है।

आलोक त्रिपाठी
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आलोक त्रिपाठी

खबरों की खोज जारी है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिलचस्पी। मध्य प्रदेश की खबरनवीसी का खास शौक।

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