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वरदराज पेरुमल मंदिर : यहां 40 साल के जलवास पर हैं भगवान विष्णु, साल 2059 में भक्तों को मिल पाएंगे दुर्लभ दर्शन

admin

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Apr 16, 2026
06:49 AM
यहां 40 साल के जलवास पर हैं भगवान विष्णु, साल 2059 में भक्तों को मिल पाएंगे दुर्लभ दर्शन

नई दिल्ली । दुनिया के सात सबसे पुराने शहरों में से एक तमिलनाडु का कांचीपुरम अपनी संस्कृति के साथ-साथ आस्था के लिए भी मशहूर है। कांचीपुरम में तकरीबन 125 बड़े मंदिर हैं, जिनका अपना-अपना इतिहास है लेकिन एक ऐसा मंदिर भी स्थापित है कि जिसकी लोकप्रियता बीते 10 सालों में बहुत बढ़ चुकी है। हम बात कर रहे हैं वरदराज पेरुमल मंदिर की।

तमिलनाडु के शांत शहर कांचीपुरम में स्थित वरदराजा पेरुमल मंदिर बाकी मंदिरों से काफी अलग है। इस मंदिर का समृद्ध इतिहास और भव्य स्थापत्य कला उसे अनोखा बनाती है। यहां भगवान विष्णु वरदराजा पेरुमल के रूप में अपनी पत्नी पेरुंदेवी थायर के साथ विराजमान हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मंदिर की स्थापना राजा कृष्ण वर्मा के शासनकाल में हुई थी, जिन्होंने थामिरबरानी नदी में स्नान करते समय एक पवित्र नीले पत्थर की मूर्ति की खोज की थी। इस मंदिर का इतिहास साहस और रक्षा की कहानियों से भरा हुआ है। माना जाता है कि राजा कृष्णवर्मा के राज्य पर आक्रमण होने के बाद उन्होंने भगवान विष्णु से प्रार्थना की थी, जब दैवीय शक्तियों ने आकर राजा की युद्ध में मदद की थी और आक्रमणकारी सेनाओं को खदेड़ दिया था।

Athi Varadaraja: Swamy Darshan Kanchipuram Varadaraja Perumal Offering His  Darshan After 40 Years, For 48 Days

भगवान विष्णु की कृपा पाकर राजा ने मंदिर का भव्य निर्माण कराया था। मंदिर अपने आकार और बनाव की वजह से काफी प्रसिद्ध है, लेकिन भक्तों की आस्था भगवान विष्णु के साथ मंदिर के गर्भगृह में मौजूद सोने और चांदी की छिपकलियों से भी जुड़ी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, दोनों छिपकलियों के दर्शन करने से अर्थ (धन) से जुड़ी परेशानी दूर होती है। ये दोनों छिपकलियां महर्षि गौतम के शिष्य माने जाते हैं, जो श्राप मुक्ति के लिए मंदिर में आए थे।

वरदराज पेरुमल मंदिर, कांचीपुरम तस्वीरें, वास्तुकला

मंदिर की सबसे खास बात है भगवान विष्णु की प्रतिमा, जो फिलहाल अभी जलवास पर है। प्रतिमा का निर्माण अंजीर के पेड़ की लकड़ी से किया गया है, और पानी में सालों तक रहने से भी प्रतिमा में कोई बदलाव नहीं आता है। प्रतिमा को आखिरी बार आनंद सरस सरोवर से 28 जून 2019 में निकाला गया। अब प्रतिमा को 2059 में निकाला जाएगा। प्रतिमा को बिना किसी सुरक्षा लेप के जलवास दिया जाता है, लेकिन न तो प्रतिमा फूलती है और न ही उसमें घुन लगता है। यही कारण है कि भक्तों के भी भगवान वरदराजा पेरुमल की आस्था अधिक है।

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