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महाकालेश्वर मंदिर : रजत आभूषणों से हुआ बाबा का भव्य शृंगार, भक्ति में लीन दिखे क्रिकेटर युजवेन्द्र चहल, साझा किया अद्भुत अनुभव

प्रफुल्ल तिवारी

प्रफुल्ल तिवारी

Jun 19, 2026
06:15 AM
रजत आभूषणों से हुआ बाबा का भव्य शृंगार, भक्ति में लीन दिखे क्रिकेटर युजवेन्द्र चहल, साझा किया अद्भुत अनुभव

उज्जैन । श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी के अवसर पर भगवान महाकाल की विश्वप्रसिद्ध भस्म आरती भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुई। तड़के ब्रह्ममुहूर्त में परंपरा अनुसार भगवान वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद श्रद्धा और आस्था के साथ बाबा महाकाल का जलाभिषेक तथा पंचामृत अभिषेक किया गया।

इस खास पल के साक्षी भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल भी बनें। उन्होंने तड़के महाकाल मंदिर पहुंचकर दिव्य भस्मारती का लाभ लिया। वे पहली बार बार भस्म आरती में शामिल हुए। दर्शन के बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का पहला भस्म आरती दर्शन था और उन्हें यहां का आध्यात्मिक माहौल बेहद पसंद आया। उन्होंने मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को जिस तरह मार्गदर्शन और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, वह प्रशंसनीय है।

रजत आभूषणों से हुआ भव्य शृंगार

भस्मारती के दौरान भगवान महाकाल का आकर्षक शृंगार किया गया। बाबा को रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट तथा विभिन्न आभूषण अर्पित किए गए। दिव्य शृंगार के बाद जब श्रद्धालुओं को दर्शन हुए तो पूरा मंदिर परिसर ष्जय श्री महाकालष् के उद्घोष से गूंज उठा। घंटियों की मधुर ध्वनि, शंखनाद और मंत्रोच्चार ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

रात से लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें

बाबा महाकाल के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार देर रात से ही मंदिर परिसर पहुंचने लगे थे। सुबह होते-होते श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर के बाहर दिखाई दीं। भस्म आरती के दौरान हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

विशेष भस्म से होती है आरती

जानकारी के अनुसार, प्राचीन काल में भस्म आरती में श्मशान की राख का उपयोग किया जाता था, लेकिन वर्तमान में विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार पवित्र भस्म का प्रयोग किया जाता है। भस्म आरती में शामिल होने वाले पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। देश-विदेश में प्रसिद्ध इस आरती के दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर कई नामचीन हस्तियां भी समय-समय पर महाकाल दरबार पहुंचती हैं।

प्रफुल्ल तिवारी
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प्रफुल्ल तिवारी

एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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