मप्र में सरकारी छुट्टियों के नियमों में बड़ा बदलाव : अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए तय हुआ स्पष्ट क्राइटेरिया, वित्त विभाग का नया आदेश जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा अवकाश नियम’ के अंतर्गत वित्त विभाग द्वारा जारी नए आदेशों में अब सभी श्रेणियों के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए छुट्टी मंजूरी का स्पष्ट क्राइटेरिया निर्धारित कर दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी को कम करना और कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना है।
विकेंद्रीकरण से बढ़ेगा स्थानीय स्तर पर निर्णय का अधिकार
नए नियमों के तहत शासन ने विकेंद्रीकरण की नीति को आगे बढ़ाते हुए अवकाश स्वीकृति के अधिकार स्थानीय स्तर पर ही सौंप दिए हैं। अब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की छुट्टियों को मंजूरी देने का पूरा अधिकार संबंधित कार्यालय प्रमुख के पास होगा। कार्यालय प्रमुख अपने स्तर पर नियमों के अनुसार अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे, जिससे छोटे स्तर की फाइलें उच्च कार्यालयों तक भेजने की आवश्यकता कम हो जाएगी।
छुट्टी की अधिकतम सीमा 120 दिन तक निर्धारित
नए प्रावधानों के अनुसार कर्मचारी एक बार में अधिकतम 120 दिनों तक का अवकाश ले सकेंगे। यह व्यवस्था कर्मचारियों की आवश्यकता और प्रशासनिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। दूसरी ओर, द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के अवकाश स्वीकृति का अधिकार अब जिला कलेक्टर को सौंप दिया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और तेज होगी।
प्रथम श्रेणी अधिकारियों के लिए विभागाध्यक्ष करेंगे निर्णय
प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के अवकाश की स्वीकृति अब संबंधित विभागाध्यक्ष कार्यालय द्वारा की जाएगी। इससे उच्च स्तर पर भी निर्णय प्रक्रिया को स्पष्ट दिशा मिलेगी और अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी।
संचालनालय और कोष स्तर पर भी तय हुए अधिकार
नए आदेशों में संचालनालय स्तर की व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। कार्यालय प्रमुख, संचालक और कोष आयुक्त को उनके अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृत करने के विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। इससे विभागीय कामकाज अधिक सुचारु और तेज गति से संचालित हो सकेगा।
प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम
सरकार का मानना है कि इस नए क्राइटेरिया के लागू होने से अवकाश स्वीकृति में होने वाली देरी समाप्त होगी और फाइलों के अनावश्यक संचलन पर रोक लगेगी। इससे न केवल प्रशासनिक कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि कर्मचारियों को भी समय पर अवकाश की सुविधा मिल सकेगी।
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