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सरकारी स्कूलों का संकट गहराया : नामांकन में भारी गिरावट से हजारों स्कूलों का अस्तित्व खतरे में

आलोक त्रिपाठी

आलोक त्रिपाठी

Jul 23, 2026
09:20 AM
नामांकन में भारी गिरावट से हजारों स्कूलों का अस्तित्व खतरे में

भोपाल। मध्य प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों ने गंभीर तस्वीर सामने रखी है। पिछले छह वर्षों में सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक करीब 28 लाख छात्रों का नामांकन घटा है। इसके साथ ही बीते दस वर्षों में 32 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक स्कूल बंद या दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिए गए हैं।

प्राथमिक शिक्षा में सबसे बड़ी गिरावट

कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2020-21 से 2026-27 के बीच कक्षा 1 से 8 तक 25.40 लाख छात्रों का नामांकन कम हुआ है। वहीं कक्षा 9 से 12 तक भी करीब 2 लाख छात्रों की संख्या घटी है। इससे सरकारी स्कूलों में बच्चों की लगातार घटती संख्या साफ दिखाई देती है।

दस साल में 32 हजार से ज्यादा स्कूल हुए कम

नामांकन में गिरावट का असर स्कूलों की संख्या पर भी पड़ा है। वर्ष 2016 में प्रदेश में 1,14,237 सरकारी प्राथमिक विद्यालय थे, जो अब घटकर 81,663 रह गए हैं। यानी दस वर्षों में 32 हजार से अधिक स्कूल बंद किए गए या उनका अन्य स्कूलों में विलय कर दिया गया।

हजारों स्कूलों में गिने-चुने छात्र

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 6,082 स्कूलों में 10 से भी कम छात्र नामांकित हैं। वहीं 13,820 स्कूलों में 20 से कम बच्चे पढ़ रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों के संचालन और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नियमित शिक्षक घटे, अतिथि शिक्षकों पर बढ़ी निर्भरता

प्रदेश में नियमित शिक्षकों की संख्या भी लगातार कम हुई है। वर्ष 2016-17 में जहां 3,45,043 नियमित शिक्षक कार्यरत थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 3,19,826 रह गई। दूसरी ओर अतिथि शिक्षकों की संख्या 63,986 से बढ़कर 81,563 हो गई है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में स्थायी शिक्षकों की कमी साफ नजर आती है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे नए सवाल

सरकार के ही आंकड़ों ने सरकारी स्कूलों में घटते नामांकन, स्कूलों के विलय और नियमित शिक्षकों की कमी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की विफलता बता रहा है, जबकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी स्कूलों में भरोसा लौटाने के लिए गुणवत्ता और संसाधनों में बड़े सुधार की जरूरत है।

आलोक त्रिपाठी
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आलोक त्रिपाठी

खबरों की खोज जारी है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में दिलचस्पी। मध्य प्रदेश की खबरनवीसी का खास शौक।

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