राजगढ़ में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनाने का पर्दाफाश : राजगढ़ में बना दिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, डिलीवरी शून्य, फिर भी बने 137 बर्थ सर्टिफिकेट

राजगढ़ में जन्म से जुड़ा सबसे बड़ा सच सवालों में है…
जब अस्पताल में एक भी डिलीवरी नहीं हुई…
तो 137 बच्चों का “जन्म” कैसे हो गया?
क्या ये सिर्फ जालसाजी है…
या सिस्टम की चुप्पी भी इसमें शामिल है?
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले से ऐसा मामला सामने आया है, जो आपको सोचने
पर मजबूर कर देगा….राजगढ़ जिले के रामगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. यहां पर स्वास्थ्य विभाग के कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटर की मिलीभगत पर बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए हैं. जब यह मामला सामने आया तो हर कोई हैरान रह गया. क्योंकि फरवरी महीने में अकेले इस स्वास्थ्य केंद्र से 137 बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बना, जबकि जांच में एक भी बच्चे की डिलीवरी नहीं हुई
दरअसल, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) को सूचना मिली थी कि स्वास्थ्य केंद्र पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं. शिकायत के आधार पर फरवरी महीने में ही बीएमओ ने इससे जुड़े ऑपरेटर को हटा दिया. लेकिन जब 6 अप्रैल को इस मामले में FIR दर्ज हुई
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी…रामगढ़ PHC में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर पदस्थ था…चौंकाने वाली बात ये रही कि फरवरी 2026 में PHC रामगढ़ में एक भी डिलीवरी नहीं हुई…इसके बावजूद आरोपी ने 137 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए…
वहीं जांच में सामने आया कि फर्जी प्रमाण पत्र अलग-अलग राज्यों के लोगों के नाम पर बने…वहीं हद तो तब हो गई, जब पता चला कि आरोपियों ने 1950 से लेकर 1980 तक के बीच का भी बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया. जबकि इस दौरान इस केंद्र में डिलीवरी होती ही नहीं थी. उस दौर में न तो गांव में मौजूदा स्वास्थ्य केंद्र था और न ही वहां ऐसी कोई सुविधा थी. आरोपियों ने सरकारी सीआरएस पोर्टल में सेंध लगाकर पुराने वर्षों के फर्जी दस्तावेंज स्कैन कर अपलोड किए थे
इसमें सिर्फ मध्य प्रदेश के लोगों के ही नहीं, बल्कि देशभर के लोगों का बर्थ सर्टिफिकेट बनाया गया. दोनों राज्यों तक फैला था नेटवर्कपुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं था. राजस्थान, सिक्किम, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों के नाम पर भी फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए
पुलिस की जानकारी के मुताबिक, आरोपियों द्वारा हर प्रमाण पत्र के 500 से 1000 रुपए वसूले जाते थे. आरोपी ने यह भी स्वीकार किया है कि लगभग 250 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए. इससे करीब 35000 रुपए की अवैध कमाई की गई. फिलहाल, पुलिस इस मामले की सघनता से जांच करने में जुटी है.
सवाल ये है कि क्या ये खेल सिर्फ एक ऑपरेटर का है…
या सिस्टम में और भी लोग शामिल हैं?
और जब माचलपुर में इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ…
तो क्या बाकी शहरों में भी जांच होगी…?
MP में स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा
राजगढ़ में बना दिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र
पुलिस ने 6 आरोपियों को किया गिरफ्तार
रामगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जन्म प्रमाण पत्र का फर्जीवाड़ा
डिलीवरी शून्य, फिर भी बने 137 बर्थ सर्टिफिकेट
250 बर्थ सर्थिफिकेट बनाने की कही बात
1950 से 1980 तक के बीच के बर्थ सर्टिफिकेट बना दिए
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
