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आप नेताओं पर हाई कोर्ट डंडाः : ‘न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश’ पर दिग्गजों को थमाया नोटिस, 4 अगस्त होगी सुनवाई

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May 19, 2026
07:29 AM
‘न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश’ पर  दिग्गजों को थमाया नोटिस, 4 अगस्त होगी सुनवाई

नई दिल्ली। न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने आप के दिग्गज नेताओं पर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। उच्च न्यायालय ने आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं को नोटिस थमा दिया है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सांसद संजय सिंह, पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज, विनय मिश्रा और दुर्गेश पाठक शामिल हैं। कोर्ट ने सभी आप नेताओं को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 4 अगस्त को होगी।

सुनवाई में कोई नेता नहीं पहुंचा, कोर्ट ने जताई नाराजगी

सबसे अहम बात यह रही कि सुनवाई के दौरान आरोपित नेताओं की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ। इस पर अदालत ने कड़ा रुख दिखाते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि सोशल मीडिया से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और उन्हें आधिकारिक कोर्ट रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए एक एमिकस क्यूरी नियुक्त किया जाएगा।

‘न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश’: हाई कोर्ट

दरअसल, 14 मई को दिल्ली हाई कोर्ट ने इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी। कोर्ट का मानना है कि आबकारी नीति मामले की सुनवाई को लेकर न्यायपालिका की छवि खराब करने के लिए एक सुनियोजित अभियान चलाया गया।

जस्टिस स्वरना कांता शर्मा ने अपने विस्तृत आदेश में कहा था कि जब उन्होंने इस केस की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार किया, तब उनके खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक बयान जारी किए गए। अदालत के मुताबिक, यह सिर्फ आलोचना नहीं थी, बल्कि आपराधिक अवमानना की सीमा को पार करने वाला व्यवहार था।

‘सुप्रीम कोर्ट जा सकते थे, लेकिन चुना सार्वजनिक हमला’

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित पक्षों के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया अपनाने के बजाय सार्वजनिक मंचों पर पत्र और वीडियो जारी कर अदालत पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगाए। अदालत ने कहा कि इस तरह के बयान जनता के बीच न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करने की कोशिश हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो इससे न्याय व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है और अराजक स्थिति पैदा हो सकती है।

अवमानना कार्यवाही के बाद जज ने खुद को किया अलग

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया था, जब अवमानना कार्यवाही शुरू होने के बाद जस्टिस शर्मा ने आबकारी नीति मामले की आगे की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। अब इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति और न्यायपालिका के बीच टकराव की बहस को फिर तेज कर दिया है।

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एक अनुभवी पत्रकार और लेखक, जो देश और दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता के साथ आप तक पहुँचाते हैं।

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