छत्तीसगढ़ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू : ने देखी 20,700 वर्गफुट की भव्य रंगोली, बस्तर दशहरा में बना आकर्षण का केंद्र

जगदलपुर। बस्तर दशहरा की भव्यता और आदिवासी संस्कृति की अनूठी झलक के बीच जगदलपुर में बनाई गई विशाल रंगोली लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। 20,700 वर्गफुट में तैयार इस रंगोली को दुनिया की सबसे बड़ी रंगोलियों में से एक बताया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान इस भव्य रंगोली को देखा और इसकी सराहना की।
राष्ट्रपति का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा शुक्रवार को संपन्न हुआ। दौरे के दूसरे दिन वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ बस्तर पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया और जगदलपुर में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में हिस्सा लिया।
20,700 वर्गफुट की रंगोली ने खींचा सबका ध्यान
जगदलपुर के लालबाग मैदान में तैयार की गई विशाल रंगोली बस्तर दशहरा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। इसका विशाल आकार और कलात्मक प्रस्तुति देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी रंगोली का अवलोकन किया और इसे बनाने वाले लोगों के प्रयासों की सराहना की।बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं और आदिवासी संस्कृति के लिए देशभर में जाना जाता है। ऐसे में इतनी विशाल रंगोली का निर्माण उत्सव की भव्यता को और बढ़ाने वाला रहा।

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मुरिया दरबार में मांझी-चालकियों से की बातचीत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जगदलपुर स्थित सिरहासार भवन में आयोजित पारंपरिक मुरिया दरबार में शामिल हुईं। यहां उन्होंने आदिवासी समाज के पारंपरिक प्रतिनिधियों, मांझी-चालकियों से संवाद किया और उनकी समस्याओं व अनुभवों को सुना।
मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस आयोजन के माध्यम से आदिवासी समाज अपनी समस्याएं, मांगें और विचार शासन-प्रशासन तक पहुंचाता है।
राष्ट्रपति ने की आदिवासी न्याय व्यवस्था की सराहना
मुरिया दरबार में राष्ट्रपति ने आदिवासी समाज की पारंपरिक विवाद निपटान व्यवस्था की सराहना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपरागत व्यवस्था में गांव स्तर पर विवादों को सुलझाने की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
राष्ट्रपति ने पारंपरिक व्यवस्था की तुलना औपचारिक न्याय प्रणाली से करते हुए कहा कि अदालतों में कई मामलों के निपटारे में वर्षों लग जाते हैं, जबकि आदिवासी समाज में मांझी से लेकर परगना तक की व्यवस्था के माध्यम से अनेक विवाद स्थानीय स्तर पर सुलझा लिए जाते हैं।
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बस्तर की संस्कृति और परंपरा को मिली नई पहचान
राष्ट्रपति का यह दौरा धार्मिक आस्था, आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। मां दंतेश्वरी मंदिर में दर्शन से लेकर मुरिया दरबार में संवाद और विशाल रंगोली के अवलोकन तक, इस दौरे में बस्तर की सांस्कृतिक पहचान प्रमुखता से सामने आई।20,700 वर्गफुट में बनाई गई रंगोली ने बस्तर दशहरा की रौनक बढ़ाई और स्थानीय लोगों के साथ आगंतुकों का ध्यान भी आकर्षित किया।
नीरज द्विवेदी
5 साल से ज्यादा का पत्रकारिता अनुभव। टीवी और प्रिंट मीडिया में कलमकारी की है। पॉलिटिकल और पब्लिक कनेक्ट की खबरों में दिलचल्पी। TV27NEWS DIGITAL में एंकरिंग भी कर रहे हैं।
