छत्तीसगढ़ : बलौदाबाज़ार के लाहोद की सरकारी शराब दुकान विवादों के केंद्र में है, ग्रामीणों ने लवन थाना पहुंचकर किया घेराव झूठा केस करने का आरोप

बलौदा बाजार से रिपोर्टर अशोक टण्डन
बलौदाबाज़ार के लाहोद की सरकारी शराब दुकान अब विवादों के केंद्र में है… आरोप है कि यहां तय कीमत से ज्यादा दाम पर शराब बेची जा रही है… और जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया… तो उनके साथ मारपीट और गुंडागर्दी की गई… मामला इतना बढ़ा कि पूरे गांव में आक्रोश फैल गया… और सैकड़ों ग्रामीणों ने लवन थाना पहुंचकर घेराव कर दिया… सवाल ये कि आखिर सरकारी दुकान में ओवररेटिंग और दबंगई को संरक्षण कौन दे रहा है… दरअसलबलौदाबाज़ार जिले के लाहोद स्थित सरकारी शराब दुकान अब ग्रामीणों के लिए परेशानी और विवाद का बड़ा कारण बन चुकी है…

ग्रामीणों ने लगाए आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि यहां शराब तय सरकारी कीमत से ज्यादा दाम पर बेची जा रही है…
यानी खुलेआम ओवररेटिंग का खेल चल रहा है…आरोप ये भी है कि आबकारी विभाग की नाक के नीचे यह पूरा खेल जारी है… और सेल्समैन को खुला संरक्षण दिया जा रहा है…जब गांव के लोगों ने ज्यादा कीमत वसूले जाने का विरोध किया… तो विवाद बढ़ गया…
बीते दिनों ओवररेटिंग को लेकर शराब दुकान कर्मचारियों और ग्रामीणों के बीच तीखा विवाद हुआ…ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने पर कर्मचारियों और बाहरी गुर्गों ने उनके साथ गाली-गलौज की… और फिर जमकर मारपीट की…इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया…लेकिन विवाद तब और बढ़ गया… जब ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई कर्मचारियों पर नहीं…बल्कि उल्टा ग्रामीणों के खिलाफ ही लवन थाने में एफआईआर दर्ज कर दी गई…
यानी पीड़ित ही आरोपी बना दिए गए…इसी एकतरफा कार्रवाई से नाराज़ होकर आज लाहोद गांव के 200 से ज्यादा महिला-पुरुष लवन पुलिस चौकी पहुंच गए…ग्रामीणों ने थाना घेरकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया…उनकी मांग साफ है…अगले सत्र से शराब दुकान गांव से हटाई जाए…ग्रामीणों पर दर्ज एफआईआर निरस्त की जाए…और ओवररेटिंग व मारपीट करने वालों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो…
मुख्य मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
शराब दुकान हटाई जाए
झूठी FIR रद्द हो
ओवररेटिंग बंद हो
हालांकि लवन पुलिस ने समझाइश देकर प्रदर्शन को शांत करा दिया…लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं…अगर सरकारी दुकान में ही तय दाम से ज्यादा वसूली होगी…और विरोध करने वालों पर ही केस दर्ज होगा…तो फिर आम ग्रामीण न्याय की उम्मीद किससे करें…?कुल मिलाकर लाहोद की शराब दुकान अब सिर्फ शराब बिक्री का केंद्र नहीं… बल्कि ग्रामीण आक्रोश का बड़ा मुद्दा बन चुकी है…जहां सवाल सिर्फ ओवररेटिंग का नहीं… बल्कि व्यवस्था, संरक्षण और न्याय का भी है…अब देखना होगा… प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करता है… या फिर ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ेगा…
नीलम अहिरवार
17 साल से टीवी और डिजिटल की दुनिया में सक्रिय। एंटरटेनमेंट, करंट अफेयर्स और पब्लिक कनेक्ट खबरों की धुरंधर। बॉलीवुड की हरकतों को दुनिया तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी।
