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Judiciary के डिजिटल युग की शुरुआत : जबलपुर से पूरे देश को मिला नया विजन, सीजेआई ने नर्मदा के उदाहरण से समझाया डिजिटल फ्यूजन

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May 16, 2026
10:54 AM
जबलपुर से पूरे देश को मिला नया विजन, सीजेआई ने नर्मदा के उदाहरण से समझाया डिजिटल फ्यूजन

जबलपुर। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में शनिवार को भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार ने देश की न्याय व्यवस्था को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा संदेश दिया। नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इन्फॉर्मेशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने दीप प्रज्वलित कर किया। सेमिनार में न्यायपालिका को तकनीक से जोड़कर आम लोगों तक त्वरित और पारदर्शी न्याय पहुंचाने पर जोर दिया गया।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से बदलेगी न्याय व्यवस्था

उद्घाटन सत्र में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि देशभर में न्यायपालिका से जुड़े अलग-अलग डिजिटल प्रयासों को अब एक मंच पर लाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल कागजों की बचत नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक सरल और सुलभ न्याय पहुंचाना है। उनके मुताबिक यदि सभी न्यायिक व्यवस्थाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ जाएंगी तो मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

नर्मदा के उदाहरण से समझाया डिजिटल फ्यूजन

सीजेआई ने अपने संबोधन में नर्मदा नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे छोटी-छोटी नदियां मिलकर विशाल नर्मदा का निर्माण करती हैं, उसी तरह न्यायपालिका में चल रहे अलग-अलग तकनीकी प्रयास मिलकर मजबूत व्यवस्था तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटल फ्यूजन ही आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

“मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कम समय में मिसाल पेश की”

मुख्य न्यायाधीश ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि यहां बहुत कम समय में उल्लेखनीय काम किया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले झारखंड हाईकोर्ट में उन्होंने न्यायिक व्यवस्था को अस्पतालों जैसी तकनीकी सुविधा से लैस करने की बात कही थी, जहां एक क्लिक पर पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके। अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाकर मिसाल पेश की है।

एआई कमेटी के परिणाम जल्द आएंगे सामने

जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद उन्होंने सबसे पहले एआई कमेटी का गठन किया था। यह समिति न्यायिक प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि इसके सकारात्मक परिणाम जल्द दिखाई देंगे। कोविड काल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब अधिकांश व्यवस्थाएं बंद थीं, तब भारतीय न्यायपालिका ने तकनीक के सहारे अपनी सेवाएं जारी रखीं और दुनिया ने इसकी सराहना की।

मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने सराहा प्रयास

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार न्यायपालिका के डिजिटल अपग्रेडेशन में हर संभव सहयोग देगी। वहीं अर्जुन राम मेघवाल ने इसे “ईज ऑफ जस्टिस” की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि मूक-बधिर लोगों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग न्याय व्यवस्था को और अधिक समावेशी बनाएगा।

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