राजधानी की लाइफ लाइन पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं : भदभदा में प्रशासन ने 9 दुकानों पर दौड़ाया बुलडोजर, सैकड़ों और होंगी जमींदोज

भोपाल। भोपाल में बड़े तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार से बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी। भदभदा इलाके में पहले ही दिन 9 दुकानों को जमींदोज किया गया। प्रशासन का लक्ष्य अगले 15 दिनों में कुल 347 अवैध कब्जों को हटाने का है।
कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने आरोप लगाया कि वे वर्षों से यहां रह रहे थे, लेकिन उन्हें पर्याप्त नोटिस या समय दिए बिना ही अचानक कार्रवाई कर दी गई। मौके पर बड़ी संख्या में लोग जुटे, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा।विरोध कर रहे लोगों का यह भी कहना है कि बड़े होटल और संस्थानों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जबकि छोटे दुकानदारों को निशाना बनाया जा रहा है। इसको लेकर प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लग रहे हैं।
एफटीएल के 50 मीटर दायरे में सख्ती
बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल से 50 मीटर तक के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस सीमा के भीतर किसी भी तरह का अतिक्रमण नहीं बचेगा। 16 मार्च 2022 को भोज वेटलैंड रूल्स लागू होने के बाद बने सभी निर्माण हटाए जाएंगे। इसी आधार पर पूरी कार्रवाई की जा रही है।
इन गांवों में सबसे ज्यादा कब्जे
टीटी नगर एसडीएम सर्कल के गौरा गांव और बिसनखेड़ी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण सामने आए हैं। इसके अलावा बैरागढ़ और बहेटा इलाके में भी बड़ी संख्या में निर्माण किए गए हैं। 25 फरवरी से शुरू हुआ अभियान 28 फरवरी के बाद धीमा पड़ गया था, लेकिन अब प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए रोजाना कार्रवाई का शेड्यूल तय कर दिया है।
किस दिन कहां चलेगा बुलडोजर
10 अप्रैल: हलालपुरा
11 अप्रैल: बैरागढ़ (काशियाना बंगले के पीछे)
12-13 अप्रैल: सेवनिया गोंड
15-16 अप्रैल: बैरागढ़ (मकान, मैरिज गार्डन)
17 अप्रैल: हुजूर तहसील
18-19 अप्रैल: टीटी नगर
20 अप्रैल: बैरागढ़ शेष अतिक्रमण
21 अप्रैल: हुजूर तहसील अंतिम कार्रवाई
वन विहार में पिलर निर्माण पर नया विवाद
कार्रवाई के बीच वन विहार नेशनल पार्क क्षेत्र में करीब 2.5 किमी में 100 से ज्यादा पिलर लगाए जाने का मामला सामने आया है। विशेषज्ञ इसे वेटलैंड नियमों के खिलाफ बता रहे हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर खान ने इस मामले को गंभीर बताते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी ) में ले जाने की तैयारी की है।
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